सीजी भास्कर, 23 अगस्त : दूध के दाम (Milk Price Hike) बढ़ाने की मांग को लेकर तिल्दा-नेवरा में दूध विक्रेताओं और डेयरी संचालकों के बीच विवाद गंभीर होता जा रहा है। शनिवार को दूध विक्रेताओं ने हड़ताल कर दूध की सप्लाई बंद कर दी। विरोध स्वरूप सोमनाथ धाम स्थित शिवनाथ नदी पहुंचकर हजारों लीटर दूध बहाया गया। सप्लाई बंद होने से घरों, होटलों, दुकानों और डेयरियों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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तिल्दा-नेवरा में बंद रही दूध की सप्लाई
शनिवार को तिल्दा-नेवरा क्षेत्र में दूध की सप्लाई पूरी तरह प्रभावित रही। दूध विक्रेताओं ने सोमनाथ धाम स्थित शिवनाथ नदी पहुंचकर दूध बहाया और अपनी मांगों के समर्थन में विरोध जताया। इसके चलते कई घरों, होटलों और डेयरियों तक दूध नहीं पहुंच सका।
दूध विक्रेताओं के मुताबिक वर्तमान में गाय का दूध 42 रुपये और भैंस का दूध 52 रुपये प्रति लीटर की दर से डेयरी संचालकों को दिया जा रहा है। उनकी मांग है कि गाय के दूध का खरीद मूल्य बढ़ाकर 52 रुपये और भैंस के दूध का मूल्य 62 रुपये प्रति लीटर किया जाए।
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बढ़ती लागत का हवाला देकर कीमत बढ़ाने की मांग
दूध विक्रेताओं और छोटे पशुपालकों का कहना है कि पशुओं के चारे, दाने और पालन-पोषण की लागत लगातार बढ़ रही है। मौजूदा दर पर दूध बेचने से उत्पादन लागत की भरपाई नहीं हो पा रही है। उनका कहना है कि उचित कीमत नहीं मिलने के कारण छोटे दूध किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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बड़े डेयरी संचालकों पर भी लगाए आरोप
छोटे दूध किसानों का आरोप है कि बड़े डेयरी संचालकों की कम दर के कारण स्थानीय पशुपालकों पर भी कम कीमत में दूध देने का दबाव बनता है। उनका कहना है कि चारे और पशुपालन की लागत बढ़ने के बावजूद यदि दूध का उचित मूल्य नहीं मिलेगा तो पशुपालन जारी रखना मुश्किल हो जाएगा।
दूध विक्रेताओं का कहना है कि वे डेयरी संचालकों को कम कीमत पर दूध उपलब्ध कराते हैं, जबकि यही दूध आगे उपभोक्ताओं को अधिक कीमत पर बेचा जाता है। ऐसे में दूध की खरीद कीमत तय करते समय छोटे किसानों के हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
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डेयरी संचालक भी अपनी बात पर कायम
दूसरी ओर, डेयरी संचालकों का कहना है कि दूध के खरीद मूल्य में अचानक बढ़ोतरी होने पर इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। यदि उन्हें महंगे दाम पर दूध खरीदना पड़ेगा तो ग्राहकों के लिए दूध की कीमत बढ़ानी पड़ सकती है। डेयरी संचालकों के मुताबिक इससे पहले से महंगाई का सामना कर रहे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
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दूध बहाकर जताया विरोध
दूध की सप्लाई बंद करने के साथ विक्रेताओं ने शिवनाथ नदी में दूध बहाकर विरोध जताया। इससे विवाद और गंभीर हो गया है। फिलहाल दूध विक्रेता अपनी मांग पर कायम हैं, जबकि डेयरी संचालक कीमत बढ़ाने के असर को लेकर अपनी आपत्ति जता रहे हैं।
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समाधान के लिए बातचीत जरूरी
दूध के दाम को लेकर जारी विवाद के बीच दोनों पक्षों के बीच बातचीत से समाधान निकालना जरूरी है। छोटे दूध किसानों को उत्पादन लागत के अनुरूप उचित मूल्य मिले, डेयरी संचालकों पर अचानक अतिरिक्त बोझ न पड़े और आम उपभोक्ताओं पर भी महंगाई का असर कम रहे, इसके लिए संतुलित समाधान की जरूरत है।
फिलहाल दूध के दाम (Milk Price Hike) को लेकर जारी विवाद के कारण तिल्दा-नेवरा में दूध की उपलब्धता प्रभावित हुई है। विवाद का जल्द समाधान नहीं होने पर आने वाले दिनों में दूध की सप्लाई पर और असर पड़ सकता है।
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