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Home » Monsoon 2026 : बारिश ने दिया बड़ा धोखा, 2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर मानसून

Monsoon 2026 : बारिश ने दिया बड़ा धोखा, 2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर मानसून

By Newsdesk Admin
01/10/2026
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Monsoon 2026 : बारिश ने दिया बड़ा धोखा, 2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर मानसून
Monsoon 2026 : बारिश ने दिया बड़ा धोखा, 2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर मानसूनMonsoon 2026 : बारिश ने दिया बड़ा धोखा, 2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर मानसून

सीजी भास्कर, 1 अक्टूबर : इस बार बारिश ने किसानों को बड़ा झटका दिया है। जून से सितंबर तक देश में सामान्य से 12.6 फीसदी कम बारिश हुई। कुल 759.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य आंकड़ा 868.6 मिलीमीटर है। IMD के मुताबिक 2026 का मॉनसून 2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर रहा और 2015 के बाद सबसे कम बारिश वाला मॉनसून बना।

Contents
  • जून में ही बिगड़ी शुरुआत
  • अल-नीनो का दिखा असर
  • खेतों पर सीधा असर
  • महाराष्ट्र में बड़ा संकट
  • फसल के बाद भी खर्च
  • जलाशयों में घटा पानी
  • अक्टूबर में भी राहत कम

कमजोर मानसून (Monsoon 2026) का असर अब खेतों से लेकर जलाशयों तक दिखाई दे रहा है। खासकर महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में लंबे ड्राय स्पेल ने खरीफ फसलों और पानी के संकट को गहरा कर दिया है। राज्य में 358 में से 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।

 

 

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जून में ही बिगड़ी शुरुआत

मॉनसून की शुरुआत ही कमजोर रही। जून में देश में बारिश सामान्य से करीब 35 फीसदी कम रही। जुलाई में स्थिति कुछ सुधरी और बारिश सामान्य के आसपास पहुंची, लेकिन अगस्त और सितंबर में फिर बारिश का घाटा बढ़ गया। IMD के आंकड़ों के मुताबिक जून-सितंबर के दौरान देश में कुल 759.4 मिलीमीटर बारिश हुई। सामान्य 868.6 मिलीमीटर के मुकाबले करीब 109 मिलीमीटर की कमी रही।

 

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अल-नीनो का दिखा असर

इस साल अल-नीनो की स्थिति मजबूत होने के साथ मॉनसून पर इसका असर दिखाई दिया। हालांकि पूरे देश में बारिश एक जैसी नहीं रही। कई इलाकों में कम बारिश हुई, जबकि बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव वाले सिस्टम ने मध्य और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में बारिश कराई। ओडिशा इसका बड़ा उदाहरण रहा, जहां कई मौसम प्रणालियों के कारण अच्छी बारिश दर्ज हुई। यानी मॉनसून की कमी (Monsoon 2026) पूरे देश में समान रूप से नहीं फैली।

 

 

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खेतों पर सीधा असर

लंबे समय तक बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों पर असर पड़ा। सोयाबीन, कपास, अरहर और दूसरी फसलों में नमी की कमी देखने को मिली। कई इलाकों में फसल की बढ़त रुक गई और खेतों में खड़ी फसल सूखने लगी। मराठवाड़ा में स्थिति ज्यादा गंभीर रही। रिपोर्टों के मुताबिक इस क्षेत्र में बारिश की कमी ने सोयाबीन और अरहर जैसी फसलों को प्रभावित किया है। कुछ इलाकों में सोयाबीन की पैदावार सामान्य के मुकाबले काफी कम रहने का अनुमान है।

 

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महाराष्ट्र में बड़ा संकट

महाराष्ट्र सरकार ने 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। यह राज्य के 358 तालुकों का करीब 74 फीसदी है। सबसे ज्यादा असर मराठवाड़ा और विदर्भ के हिस्सों में दिखाई दे रहा है। मराठवाड़ा में कई इलाकों में लंबे समय से बारिश का अंतर बना हुआ है। लातूर, बीड और धाराशिव जैसे जिलों में खेती के साथ पशुओं और ग्रामीण परिवारों के लिए पानी की चिंता भी बढ़ी है।

 

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फसल के बाद भी खर्च

फसल खराब होने के बाद किसानों की परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। खेत को अगली फसल के लिए तैयार करने में सूखी फसल हटाने, जुताई, बीज और खाद पर फिर खर्च करना पड़ेगा। यानी जिन किसानों ने खरीफ में बीज, खाद और मजदूरी पर पैसा लगाया था, उनके सामने अब अगली खेती का संकट (Monsoon 2026) भी खड़ा हो गया है। फसल से अपेक्षित आमदनी नहीं होने के कारण रबी की तैयारी के लिए पूंजी जुटाना चुनौती बन सकता है।

 

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जलाशयों में घटा पानी

कम बारिश का असर जल स्रोतों पर भी पड़ा है। महाराष्ट्र के प्रभावित क्षेत्रों में जलाशयों और ग्रामीण जल स्रोतों में पानी का स्तर कम हुआ है। इससे सिंचाई के साथ पेयजल और पशुओं के लिए पानी की चिंता बढ़ी है। महाराष्ट्र सरकार ने सूखाग्रस्त तालुकों में फसल नुकसान के आकलन और राहत उपाय शुरू करने की बात कही है। इनमें कृषि ऋण पुनर्गठन, भूमि राजस्व में रियायत और कृषि पंपों से जुड़ी राहत जैसे कदम शामिल हैं।

 

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अक्टूबर में भी राहत कम

मॉनसून के कमजोर रहने के बाद अक्टूबर में भी देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश रहने का अनुमान है। IMD के मुताबिक अल-नीनो का प्रभाव आने वाले महीनों में भी मौसम पर असर डाल सकता है। इसलिए मॉनसून 2026 (Monsoon 2026) की कमी का असर सिर्फ खरीफ तक सीमित नहीं रहेगा। मिट्टी में नमी, सिंचाई के पानी और रबी की बुआई की स्थिति पर भी इसका असर पड़ सकता है।

 

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