सीजी भास्कर, 15 अक्टूबर। नवा रायपुर की जंगल सफारी लगातार आर्थिक घाटे (Naya Raipur Jungle Safari) से जूझ रही है। हर साल करीब 18 करोड़ रुपये का नुकसान होने के कारण अब वन विभाग वन्यजीवों को औद्योगिक घरानों से गोद दिलाने की योजना बना रहा है। इसके अलावा सफारी को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है।

वन्यजीवों की देखभाल पर सबसे ज्यादा खर्च Naya Raipur Jungle Safari
बाघ और सिंह जैसे वन्यजीवों के भोजन और इलाज पर बड़ी राशि खर्च होती है। ऐसे में वन विभाग औद्योगिक घरानों से संपर्क कर उनकी देखभाल का खर्च उठाने में सहयोग लेने की तैयारी कर रहा है।
यह भी पढ़ें…Gold Silver Price : रायपुर में हल्की ज्वेलरी की बढ़ी मांग, सोने-चांदी के भाव स्थिर रहने से बाजार को उम्मीद
विदेशी जानवर लाने की योजना रही अधूरी
करीब 320 हेक्टेयर में फैली जंगल सफारी का उद्घाटन 1 नवंबर 2016 को हुआ था। यहां ओरंगुटान, जिराफ और चिंपैंजी जैसे विदेशी वन्यजीवों को लाने की योजना भी बनाई (Naya Raipur Jungle Safari) गई थी, लेकिन यह सफल नहीं हो सकी। गुजरात से लाए गए जेब्रा के एक जोड़े की भी मौत हो गई थी।
टिकट के दाम बढ़ाकर घाटा कम करने की कोशिश
आर्थिक नुकसान कम करने के लिए जंगल सफारी में प्रवेश शुल्क बढ़ाया (Naya Raipur Jungle Safari) गया है। सामान्य बस का टिकट 100 से बढ़ाकर 150 रुपये और एसी बस का शुल्क 200 रुपये किया गया है। बच्चों के मुफ्त प्रवेश की उम्र सीमा भी घटाई गई है।
यह भी पढ़ें…Tatibandh Siltara Road : रायपुर में पांच साल से अधूरी सर्विस रोड, 600 मीटर जमीन अधिग्रहण के बाद बनेगी सड़क
वन विभाग अब वन्यजीवों को गोद देने और पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के जरिए सफारी की आर्थिक स्थिति सुधारने की कोशिश में जुटा है।
खबरें और भी हैं…Tatibandh Siltara Road : रायपुर में पांच साल से अधूरी सर्विस रोड, 600 मीटर जमीन अधिग्रहण के बाद बनेगी सड़क


