सीजी भास्कर, 21 जुलाई। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में छत्तीसगढ़ के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। राजधानी रायपुर में विभिन्न छात्र और सामाजिक संगठनों से जुड़े युवाओं ने डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर धरना देकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। (Raipur Hunger Strike)
प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई के पांच कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। इनमें हेमंत पाल, अनुज शुक्ला, इंडिया घृतलहरे, ड्रिंकल और सोनम शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने खून से “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग की।
इधर, धमतरी में सामाजिक कार्यकर्ता मितेश जैन ने गांधी मैदान में सोनम वांगचुक के समर्थन में एक दिवसीय अनशन किया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने भी अनशन स्थल पहुंचकर अपना समर्थन जताया। वहीं बीजापुर में बस्तर संभाग के आदिवासी युवा-छात्र संगठन ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम पत्र भेजकर वांगचुक की मांगों पर सकारात्मक पहल करने की अपील की।
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रायपुर में प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना है कि वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शामिल नहीं हो सके, इसलिए प्रदेश में रहकर ही शिक्षा सुधार और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों और युवाओं के अधिकारों और भविष्य की लड़ाई है।
धरने में शामिल छात्रों ने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों (Raipur Hunger Strike) ने लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों का भविष्य प्रभावित किया है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था लागू करने की मांग की।
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प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि लगातार हो रहे परीक्षा विवादों की नैतिक जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार से ठोस और प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई का भी विरोध किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।
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रायपुर में आंदोलन के पहले दिन भी बड़ी संख्या में छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। प्रदर्शन (Raipur Hunger Strike) के बाद राज्यपाल के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया था। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने तक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन और भूख हड़ताल जारी रहेगी।
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