सीजी भास्कर, सरगुजा, 6 नवंबर 2026। ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को मंच देने के उद्देश्य से आयोजित सरगुजा ओलंपिक (Surguja Olympics Mismanagement) में बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिला स्तरीय प्रतियोगिता के समापन के बाद सीतापुर ब्लॉक के 50 से अधिक बच्चे बुधवार देर रात तक अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में भूखे-प्यासे बस का इंतजार करते रहे। बच्चों को घर पहुंचाने की व्यवस्था नहीं होने पर उन्होंने वीडियो कॉल कर सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो को अपनी परेशानी बताई। विधायक के हस्तक्षेप के बाद आधी रात को अधिकारी सक्रिय हुए और भोजन के साथ दो बसों की व्यवस्था कर बच्चों को रवाना किया गया।
बस के इंतजार में बीती रात
जिला स्तरीय सरगुजा ओलंपिक का समापन शाम करीब छह बजे हुआ था। इसके बाद अलग-अलग जनपद पंचायतों की जिम्मेदारी थी कि वे अपने खिलाड़ियों को सुरक्षित घर पहुंचाएं। इसके लिए प्रत्येक जनपद के सीईओ को ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिता और चयनित खिलाड़ियों को जिला स्तर तक लाने-ले जाने के लिए तीन लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया था।
सीतापुर ब्लॉक के बच्चों ने दोपहर में भोजन किया था। प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि बस आएगी और वे घर लौट सकेंगे, लेकिन शाम से रात हो गई और बस नहीं पहुंची। बच्चे गांधी स्टेडियम में ही इंतजार करते रहे। रात करीब 10:30 बजे वहां से गुजर रहे शहरवासियों ने बड़ी संख्या में बच्चों को भटकते देखा, जिसके बाद मामला सामने आया।
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वीडियो कॉल से विधायक को बताई परेशानी
स्टेडियम पहुंचे शहरवासियों की मदद से कुछ बच्चों ने वीडियो कॉल के जरिए विधायक रामकुमार टोप्पो से संपर्क किया। बच्चों ने उन्हें बताया कि वे काफी देर से भूखे-प्यासे हैं और घर जाना चाहते हैं। इसके बाद विधायक ने तत्काल जिला प्रशासन के अधिकारियों से बात की।
विधायक के हस्तक्षेप के बाद जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी रोमा श्रीवास्तव स्वयं गांधी स्टेडियम पहुंचीं। उनके साथ आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ललित शुक्ला, खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा जनपद पंचायत के अधिकारी-कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे।
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आधी रात को भोजन और बस
अधिकारियों ने पहले सभी बच्चों को नवापारा स्थित आदिवासी विकास विभाग के छात्रावास पहुंचाया। वहां रात में भोजन तैयार करवाया गया और बच्चों को खाना खिलाया गया। इस पूरी व्यवस्था में रात के 12 बज चुके थे। इसके बाद जिला पंचायत सीईओ की पहल पर बसों की व्यवस्था की गई। इसी बीच सीतापुर जनपद की ओर से भेजी जाने वाली बस भी देर से पहुंची। आखिरकार दो बसों से बच्चों को सीतापुर रवाना किया गया। अधिकारियों ने निर्देश दिया कि प्रत्येक बच्चे को उसके घर तक सुरक्षित छोड़ा जाए। मध्यरात्रि के बाद बच्चे अपने-अपने घर पहुंच सके।
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तीन लाख के बजट पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग और जनपद पंचायत सीतापुर की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब प्रत्येक जनपद को खिलाड़ियों के आवागमन के लिए तीन लाख रुपये आवंटित किए गए थे, तो बच्चों को देर रात तक बस के इंतजार में क्यों रहना पड़ा?
अधिकारियों की ओर से दलील दी जा रही है कि सीतापुर से बच्चों को लाने के लिए भेजी गई बस में तकनीकी खराबी आ गई थी। हालांकि, इसकी सूचना समय पर संबंधित अधिकारियों को दी गई थी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। बच्चों के भोजन और घर वापसी की जिम्मेदारी तय करने के लिए मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
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जिम्मेदारी तय कर होगी कार्रवाई
जिला पंचायत की सीईओ रोमा श्रीवास्तव ने बताया कि बच्चों को भोजन कराने के बाद सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचा दिया गया है। ऐसी परिस्थिति क्यों बनी, इसकी जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले में जिम्मेदारी तय करने के साथ ही कार्रवाई भी की जाएगी।
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