सीजी भास्कर, 11 जुलाई। जिला बलौदाबाजार-भाटापारा में अंधविश्वास फैलाने वाले और धोखाधड़ी करने वाले अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सिमगा पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। भूत-प्रेत का साया दूर करने और पूजा-पाठ के नाम पर एक कॉलेज छात्रा से ऑनलाइन ठगी करने वाले मध्य प्रदेश के शातिर आरोपी जयप्रकाश मिश्रा को न्यायालय ने जेल की सजा सुनाई है। इस पूरे मामले में विवेचना अधिकारी प्रधान आरक्षक ओंकार सिंह राजपूत द्वारा प्रस्तुत किए गए पुख्ता वैज्ञानिक और दस्तावेजी साक्ष्य आरोपी को सजा दिलाने में मील का पत्थर साबित हुए। यह पूरा मामला सिमगा थाना क्षेत्र का है। (Tantrik Online Fraud Case)
क्या था अंधविश्वास और ठगी का यह मामला : Tantrik Online Fraud Case
प्रार्थी छात्रा (बीएससी थर्ड सेमेस्टर) निवासी सिमगा को आरोपी जयप्रकाश मिश्रा (44) ने उसके मोबाइल नंबर पर कॉल किया और खुद को तांत्रिक बताते हुए पीड़िता को डराया कि उसके ऊपर भूत-प्रेत का साया है और यदि पूजा-पाठ नहीं कराया गया तो अनहोनी हो जाएगी। आरोपी ने अंधविश्वास का झांसा देकर अलग-अलग समय में पीड़िता से अपने क्यूआर कोड पर कुल 18,600/- की धोखाधड़ी कर ट्रांसफर करा लिए। पीड़िता की शिकायत पर थाना सिमगा में अपराध क्र. 490/2025 दर्ज कर मामला जांच में लिया गया था।

प्रधान आरक्षक ओंकार राजपूत की मजबूत विवेचना
केस डायरी मिलते ही विवेचना अधिकारी प्रधान आरक्षक ओंकार सिंह राजपूत ने अत्यंत सूझबूझ और वैज्ञानिक पद्धति से जांच शुरू की। उन्होंने तत्काल घटना स्थल का निरीक्षण कर गवाहों के बयान दर्ज किए और घटना स्थल का नजरी नक्शा तैयार किया। आरोपी को सजा की दहलीज तक पहुंचाने के लिए प्रधान आरक्षक राजपूत ने बैंक ऑफ बड़ौदा, सिमगा से संपर्क कर पीड़िता के बैंक खाते का पूरा स्टेटमेंट और तकनीकी साक्ष्य जुटाए। इन अकाट्य सबूतों के आधार पर उन्होंने आरोपी को मध्य प्रदेश के शहडोल से गिरफ्तार किया और माननीय न्यायालय के समक्ष एक बेहद मजबूत अभियोग पत्र (चार्जशीट) पेश की। उनके द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की मजबूती का ही परिणाम था कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ संदेह से परे अपराध साबित करने में पूरी तरह सफल रहा।
माननीय न्यायालय का कड़ा फैसला और सजा : Tantrik Online Fraud Case
मामले की गंभीरता और पुख्ता गवाहों को दृष्टिगत रखते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सिमगा, योगिता जांगड़े की अदालत ने आरोपी जयप्रकाश मिश्रा को दोषी करार देते हुए दिनांक 9 जुलाई को आदेश पारित कर निम्नलिखित सजा सुनाई है-
धारा 318(4) BNS के तहत: 02 वर्ष का कारावास एवं ₹300/- का अर्थदंड (जुर्माना न पटाने पर 1 माह का अतिरिक्त कारावास)।
धारा 319(2) BNS के तहत: 01 वर्ष का कारावास एवं ₹200/- का अर्थदंड (जुर्माना न पटाने पर 1 माह का अतिरिक्त कारावास)।
यह दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अंधविश्वास के नाम पर ठगी करने वाले इस अंतर्राज्यीय ठग को सजा दिलाने में सहायक लोक अभियोजन अधिकारी मनीष कुमार केशर तथा थाना सिमगा के प्रधान आरक्षक ओंकार सिंह राजपूत की अत्यंत सराहनीय एवं उत्कृष्ट भूमिका रही है, जिनकी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सराहना की गई है।


