सीजी भास्कर, 30 सितंबर। रायपुर में अब गीला और सूखा ही नहीं, बल्कि कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटना (Waste Management) होगा। नए सिस्टम में गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाला कचरा अलग रखना जरूरी होगा। नियमों का पालन नहीं करने पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाया जा सकता है।

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रायपुर-बिलासपुर में होगी निगरानी Waste Management
केंद्र की ‘प्रगति 50’ योजना में रायपुर और बिलासपुर को शामिल किया गया है। रायपुर को 4 क्लस्टर और करीब 5 हजार बीट में बांटने की तैयारी है। सेंट्रल कंट्रोल सेंटर से कचरा उठाने से लेकर उसके निपटारे तक की निगरानी होगी।
बड़े संस्थानों की भी जिम्मेदारी
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रोजाना 100 किलो या उससे ज्यादा कचरा पैदा करने वाले बड़े संस्थानों समेत बल्क वेस्ट जनरेटर को कचरे के संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण की व्यवस्था खुद करनी होगी। बिना पंजीकरण काम करने या गलत जानकारी देने पर कार्रवाई हो सकती है।
पुराने कचरे का भी होगा निपटारा
पुराने कचरे के ढेर हटाने के लिए बायोमाइनिंग और बायोरिमेडिएशन किया (Waste Management) जाएगा। लैंडफिल में सिर्फ वही कचरा भेजा जाएगा, जिसे रिसाइकिल या ऊर्जा में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
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नए सिस्टम में कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी सिर्फ नगर निगम की नहीं होगी। घर से कचरा निकलते समय ही उसे सही श्रेणी में अलग करना जरूरी होगा।
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