सीजी भास्कर 29 अप्रैल I जनवरी से शुरू हुई 12 हफ्तों की अवधि में WhatsApp ने भारत में डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़े 9400 से ज्यादा अकाउंट्स को बैन कर दिया है। (Major action against Digital Arrest scam in India)
यह कार्रवाई Meta Platforms के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म ने सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर की है।इस मामले की जानकारी Supreme Court of India में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल R. Venkataramani ने दी।
कैसे काम करता था डिजिटल अरेस्ट स्कैम : Major action against Digital Arrest scam in India
WhatsApp की जांच में सामने आया कि जालसाज खुद को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे।
ठग अक्सर “Delhi Police”, “Mumbai HQ”, “CBI” और “ATS” जैसे नामों का इस्तेमाल करते थे और प्रोफाइल फोटो में सरकारी लोगो लगाकर भरोसा जीतते थे। इसके बाद लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर पैसे वसूले जाते थे।
कंबोडिया से ऑपरेट हो रहा था नेटवर्क
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि भारतीय यूजर्स को निशाना बनाने वाले ज्यादातर अकाउंट दक्षिण-पूर्व एशिया, खासकर कंबोडिया में मौजूद स्कैम सेंटर्स से संचालित हो रहे थे।यानी भारत में फैल रहा यह डिजिटल ठगी का जाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित किया जा रहा था।
सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर कार्रवाई
WhatsApp ने बताया कि यह कार्रवाई Indian Cyber Crime Coordination Centre, Ministry of Electronics and Information Technology और दूरसंचार विभाग से मिली जानकारी के आधार पर की गई। कंपनी का कहना है कि अब वह सिर्फ शिकायतों पर कार्रवाई नहीं कर रही, बल्कि सक्रिय रूप से ऐसे नेटवर्क को पहचानकर खत्म कर रही है। (Major action against Digital Arrest scam in India)
SIM बाइंडिंग लागू करने पर सहमति
I4C की स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, WhatsApp ने सब्सक्राइबर आइडेंटिटी मॉड्यूल (SIM बाइंडिंग) लागू करने पर सहमति जताई है।इसके तहत यूजर्स की पहचान को मोबाइल सिम से जोड़कर फर्जी अकाउंट्स पर रोक लगाने की कोशिश की जाएगी। कंपनी ने यह भी कहा कि वह IT नियम 2021 का पालन करेगी और कानूनी सीमाओं के भीतर डेटा साझा करती रहेगी।


