सीजी भास्कर, 18 जुलाई। मांदर गांव में बाढ़ की यादें आज भी लोगों के चेहरों पर साफ दिखाई (Flood Rehabilitation) देती हैं। गांव की गलियों में बातचीत का सबसे बड़ा विषय अब भी वही तबाही है जिसने कई परिवारों की छत छीन ली थी। लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि इस बार उनकी वर्षों की परेशानी का कोई स्थायी हल जरूर निकलेगा।
गांव के प्रभावित परिवार बताते हैं कि शुरुआती दौर में प्रशासनिक गतिविधियां तेज दिखीं, जमीन देखने से लेकर पुनर्वास की बातें भी हुईं, लेकिन समय बीतने के साथ मामला धीमा पड़ गया। अब एक साल बाद भी कई परिवार अपने स्थायी आशियाने का इंतजार कर रहे हैं और भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

यह भी पढ़ें : Bodhghat Police : हर रविवार थाने पहुंचने का क्यों मिला आदेश, पुलिस की इस सख्ती से बढ़ी कई लोगों की चिंता
एक साल बाद भी अधूरा है पुनर्वास Flood Rehabilitation
लोहंडीगुड़ा क्षेत्र के मांदर गांव में 26 अगस्त 2025 को आई भीषण बाढ़ ने कई परिवारों का जीवन बदल दिया था। नानी बहार नाले में आए तेज बहाव से दर्जनों मकान प्रभावित हुए थे। घटना के एक वर्ष बाद भी बड़ी संख्या में प्रभावित परिवारों का स्थायी पुनर्वास पूरा नहीं हो सका है।
जमीन चयन पर ग्रामीणों ने जताई आपत्ति
ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्वास के लिए प्रशासन ने जमीन तो चिन्हित की, लेकिन वह उनकी जरूरतों के अनुरूप नहीं थी। उनका आरोप है कि कई परिवारों को अलग अलग भूखंड नहीं मिल पाए। इसके अलावा प्रस्तावित स्थान गांव से दूर होने और बरसात के समय वहां पहुंचने में आने वाली दिक्कतों ने भी पुनर्वास की प्रक्रिया को प्रभावित किया।
यह भी पढ़ें : Durg cyber fraud : ठगी के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले 9 आरोपी गिरफ्तार
खेती छोड़ना नहीं चाहते प्रभावित परिवार
प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। ऐसे में पुश्तैनी जमीन छोड़कर दूसरी जगह बसना उनके लिए आसान फैसला नहीं है। कुछ परिवारों को मुआवजा जरूर मिला, लेकिन संयुक्त परिवारों में सभी प्रभावित सदस्यों तक राहत का समान लाभ नहीं पहुंच सका।
अपनी जमीन पर ही बना रहे नए मकान Flood Rehabilitation
बदलते हालात को देखते हुए अब अधिकांश परिवार अपनी ही जमीन पर अपेक्षाकृत ऊंचे स्थान पर नए मकान तैयार कर रहे हैं। वहीं नाले के किनारे बने कई पुराने घरों में दरारें आने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है। बरसात के मौसम में इन मकानों की सुरक्षा को लेकर परिवार लगातार आशंकित हैं।
यह भी पढ़ें : Durg woman murder case : महिला हत्याकांड में CCTV से मिले अहम सुराग
सुरक्षित पुनर्वास की कर रहे मांग
ग्रामीणों की मांग है कि पुनर्वास की ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे उनकी खेती भी सुरक्षित बनी रहे और भविष्य में बाढ़ जैसी आपदा से जान माल का नुकसान (Flood Rehabilitation) न हो। उनका कहना है कि एक वर्ष बीतने के बाद भी स्थायी समाधान नहीं मिलने से प्रभावित परिवारों में निराशा का माहौल है।
ख़बरें और भी हैं : Mahendra Goenka arrested :1000 करोड़ की कथित धोखाधड़ी,10 दिन की रिमांड पर भेजे गए



