सीजी भास्कर, 11 अगस्त : छत्तीसगढ़ में किसानों को औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने की दिशा में पहल की जा रही है। छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की योजना के तहत नारायणपुर और धमतरी जिले के किसानों तथा स्व-सहायता समूहों को 54 लाख 36 हजार रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह राशि किसानों को खेती शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता के रूप में प्रदान की जाएगी।
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11 अगस्त को रायपुर में होगा कार्यक्रम
अग्रिम प्रोत्साहन राशि वितरण का कार्यक्रम 11 अगस्त को दोपहर 12 बजे रायपुर स्थित बोर्ड कार्यालय सभागार में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन मंत्री केदार कश्यप होंगे। इसकी अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम करेंगे। बोर्ड के उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला विशेष रूप से मौजूद रहेंगे।
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खेती शुरू करने के लिए मिलेगा आर्थिक सहयोग
योजना के तहत मिलने वाली अग्रिम राशि से किसानों को औषधीय पौधों की खेती शुरू करने में आर्थिक मदद मिलेगी। किसान बोर खनन, पंप, पाइप, जुताई, रोपाई, निराई और अन्य कृषि कार्यों के लिए इस राशि का उपयोग कर सकेंगे। इससे उन्हें खेती की शुरुआत के लिए कर्ज लेने की जरूरत कम होगी।
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ब्राह्मी, वच, खस और लेमनग्रास की खेती को बढ़ावा
औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती (Medicinal Plants Farming) को किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर विकल्प माना जा रहा है। बोर्ड की ओर से ब्राह्मी, वच, खस, लेमनग्रास और शतावर जैसी फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन पौधों की बाजार में मांग को देखते हुए किसानों को उपज की बिक्री के लिए भी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
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मुफ्त पौधे, प्रशिक्षण और खरीदी की सुविधा
योजना के अंतर्गत किसानों को नि:शुल्क पौधे उपलब्ध कराने के साथ खेती का प्रशिक्षण और अध्ययन भ्रमण भी कराया जाता है। किसानों की उपज की खरीदी के लिए विभिन्न संस्थाओं के साथ अनुबंध किया गया है। जरूरत के अनुसार किसानों को अग्रिम प्रोत्साहन राशि भी उपलब्ध कराई जाती है।
तीन मॉडल से संचालित हो रही योजना
औषधीय पौधों की खेती के लिए योजना को क्लस्टर मॉडल, व्यक्तिगत किसान मॉडल और स्व-सहायता समूह मॉडल के जरिए संचालित किया जा रहा है। क्लस्टर मॉडल में एक क्षेत्र के कई किसान मिलकर खेती करते हैं, जिससे उत्पादन और उपज की खरीदी व परिवहन आसान होता है। वहीं स्व-सहायता समूहों को सामुदायिक भूमि पर औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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धमतरी के 25 गांवों के 45 समूहों को लाभ
धमतरी जिले के 25 गांवों में 45 स्व-सहायता समूह करीब 115 एकड़ क्षेत्र में औषधीय पौधों की खेती कर रहे हैं। इन समूहों को 38 लाख 89 हजार 760 रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अलावा नारायणपुर और धमतरी के व्यक्तिगत किसानों तथा क्लस्टर स्तर पर खेती करने वाले किसानों को भी योजना के तहत प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
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किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
औषधीय पौधों की खेती (Medicinal Plants Farming) से किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आय का अतिरिक्त स्रोत मिलेगा। वहीं महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने में भी मदद मिलेगी। शासन की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



