सीजी भास्कर, 31 अगस्त। छत्तीसगढ़ के करीब 10 लाख बच्चों को इस साल आंगनबाड़ी केंद्रों में प्री-स्कूल किट नहीं मिल पाएगी। प्रदेश के 52 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए किट खरीदी का बजट अब तक जारी नहीं होने के कारण टेंडर प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में नए सत्र में बच्चों को खेल-खेल में सीखने वाली जरूरी शिक्षण सामग्री से वंचित रहना पड़ सकता है। (Anganwadi Pre School Kit)
आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 6 साल के बच्चों को पोषण आहार देने के साथ स्कूल के लिए तैयार किया जाता है। बच्चों को अक्षर, संख्या, रंग और आकार की पहचान के अलावा बोलने, समूह में काम करने और विभिन्न वस्तुओं की पहचान जैसी गतिविधियां कराई जाती हैं। इन गतिविधियों में प्री-स्कूल किट की अहम भूमिका होती है।
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एक किट में होती हैं 19 तरह की सामग्री : Anganwadi Pre School Kit
एक सामान्य आंगनबाड़ी केंद्र के लिए किट में करीब 19 तरह की सामग्री शामिल होती है। इसमें बिल्डिंग ब्लॉक, गुड़िया, जानवरों के मुखौटे, किचन सेट, डॉक्टर सेट, पजल, वुडन बोर्ड और हैंड पपेट जैसी चीजें शामिल हैं। वहीं, मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए करीब 10 प्रकार के खिलौने दिए जाते हैं।
बच्चों को शारीरिक गतिविधियों के लिए बैट-बॉल, सीटी, रबर रिंग, फ्लाइंग डिस्क और लट्टू जैसी सामग्री भी दी जाती है। इसके अलावा शेप और सिलेंडर बॉक्स से आकार की पहचान, जबकि रंगीन कागज, क्रेयॉन, स्लेट और काउंटिंग फ्रेम से पेंटिंग, अक्षर ज्ञान और गिनती का अभ्यास कराया जाता है।

अप्रैल-मई में होना था टेंडर
प्री-स्कूल किट की खरीदी के लिए सामान्य तौर पर अप्रैल-मई में टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाती है। इसके बाद जून तक खरीदी पूरी कर जुलाई में नए सत्र की शुरुआत के साथ किट आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाई जाती है। इस बार अगस्त तक बजट नहीं मिलने के कारण टेंडर और खरीदी की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।
अब टेंडर, खरीदी, सामग्री की आपूर्ति और प्रदेश के 52 हजार केंद्रों तक वितरण में लगने वाले समय को देखते हुए इसी सत्र में किट उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
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पुरानी सामग्री से काम चलाने की मजबूरी : Anganwadi Pre School Kit
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के अनुसार, हर साल इस्तेमाल होने के कारण खिलौने और शिक्षण सामग्री टूटने या खराब होने लगती हैं। कुछ सामग्री बच्चों के साथ घर भी चली जाती है। ऐसे में नई किट नहीं मिलने से अक्षर ज्ञान, गिनती, फलों-सब्जियों की पहचान और पेंटिंग जैसी गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। हालांकि कार्यकर्ताओं का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों के जरिए बच्चों को गतिविधियां कराने का प्रयास जारी रहेगा।
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