सीजी भास्कर, 1 सितंबर 2026 : छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग में नियमों को दरकिनार कर दागी अधिकारी को पदोन्नति (CGPSC Promotion Scam) देने का आरोप सामने आया है। तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी पर विभागीय जांच और आयोग के सदस्य की दंडात्मक अनुशंसा को नजरअंदाज करने का आरोप है। वहीं, 73 छात्रावास अधीक्षकों से वसूली की सिफारिश किए जाने का भी मामला सामने आया है। पदोन्नति को लेकर आरटीआई से मिले दस्तावेजों के आधार पर CBI, EOW और मुख्य सचिव से शिकायत की गई है।
50 रुपये का रजिस्टर 152 रुपये में खरीदा
मामला आदिम जाति विकास विभाग के तत्कालीन सहायक आयुक्त भूपेंद्र कुमार राजपूत से जुड़ा है। वर्ष 2020 में रायगढ़ में पदस्थापना के दौरान छात्रावासों के लिए 50 रुपये बाजार मूल्य वाली रजिस्टर-पंजी 152 रुपये प्रति नग की दर से खरीदी गई थी। खरीद में वित्तीय अनियमितता और कमीशनखोरी की शिकायत के बाद विभागीय जांच शुरू हुई।
जांच में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होने का दावा किया गया। इसके बाद आयोग के नामांकित सदस्य सुकृत लाल साव ने भूपेंद्र राजपूत के खिलाफ 50 प्रतिशत राशि यानी 1,48,920 रुपये की वसूली और निंदा का दंडात्मक अभिमत दिया था। इसी अनुशंसा को बाद में दरकिनार किए जाने का आरोप पदोन्नति (CGPSC Promotion Scam) मामले में लगाया गया है।
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अध्यक्ष ने सदस्य की राय को किया दरकिनार
आयोग की नियमावली के अनुसार, अध्यक्ष किसी सदस्य की राय से असहमत होने पर मामले को दूसरे सदस्य की राय के लिए भेज सकते हैं या पूर्ण आयोग के समक्ष रखकर बहुमत से फैसला कराया जाना चाहिए। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
आरोप के मुताबिक, उन्होंने अकेले ही सदस्य की दंडात्मक अनुशंसा को निरस्त कर दिया और संबंधित अधिकारी को दोषमुक्त करते हुए पदोन्नति की अनुशंसा कर दी। शिकायतकर्ता ने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है। नियमों की अनदेखी (CGPSC Promotion Scam) को लेकर सामने आए दस्तावेजों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
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73 अधीक्षकों से वसूली की सिफारिश
शिकायत के अनुसार, आरोपी अधिकारी को राहत देने के साथ ही 73 छात्रावास अधीक्षकों से वसूली की सिफारिश की गई। दावा है कि ये अधीक्षक न तो कार्रवाई में आरोपी थे और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था।
आरटीआई कार्यकर्ता आशीष देव सोनी ने सूचना के अधिकार के तहत हासिल दस्तावेजों के आधार पर मामले को उठाया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ कथित नुकसान की राशि की रिकवरी की मांग की है। वसूली की सिफारिश (CGPSC Promotion Scam) की शिकायत CBI, EOW, मुख्य सचिव और सामान्य प्रशासन विभाग तक पहुंचाई गई है।
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प्रमोशन के बाद मंत्रालय में महत्वपूर्ण पद
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन अध्यक्ष की अनुशंसा के बाद भूपेंद्र कुमार राजपूत को पदोन्नति देकर अतिरिक्त संचालक बनाया गया। वर्तमान में उनके मंत्रालय में संयुक्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर पदस्थ होने की जानकारी सामने आई है।
आरटीआई कार्यकर्ता ने 17 जून 2020 को जारी बताए जा रहे परामर्श पत्र को निरस्त करने और आयोग के नामांकित सदस्य के असहमतिपूर्ण अभिमत के आधार पर मामले की समीक्षा करने की मांग की है। दागी अधिकारी को प्रमोशन (CGPSC Promotion Scam) देने के आरोपों पर अब जांच एजेंसियों की कार्रवाई का इंतजार है।
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CBI और EOW तक पहुंची शिकायत
मामले में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और कथित नुकसान की राशि की रिकवरी की मांग की गई है। शिकायत CBI, EOW, मुख्य सचिव और सामान्य प्रशासन विभाग तक पहुंचाई गई है। अब संबंधित दस्तावेजों की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई से मामले की तस्वीर साफ होगी।
CGPSC Promotion Scam के आरोपों ने आयोग की निर्णय प्रक्रिया और अधिकारियों को दिए गए लाभ पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
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