सीजी भास्कर, 2 सितंबर : भिलाई स्टील प्लांट में करीब 250 टन लौह स्क्रैप चोरी के मामले में कथित मास्टरमाइंड संजय सिंह को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है। पुलिस ने फ्लू डस्ट की आड़ में प्लांट से स्क्रैप बाहर निकालने वाले नेटवर्क में संजय सिंह की भूमिका होने का आरोप लगाया था। अब (BSP Scrap Case) में हाई कोर्ट से उन्हें राहत मिली है।
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250 टन स्क्रैप चोरी का है मामला
पुलिस के अनुसार मामले की शुरुआत 26 मई 2026 को हुई थी। BSP के ब्लास्ट फर्नेस से निकलने वाली फ्लू डस्ट को बाहर ले जाने वाले दो वाहनों की जांच की गई थी। जांच के दौरान वाहनों में फ्लू डस्ट के साथ आयरन स्क्रैप भी मिला।
इसके बाद प्लांट प्रबंधन की शिकायत पर पुरानी भिलाई थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया। पुलिस ने आरोप लगाया कि फ्लू डस्ट के परिवहन की आड़ में BSP का लौह स्क्रैप बाहर निकालकर खपाया जा रहा था। इसी जांच में (BSP Scrap Case) से जुड़े कई लोगों की भूमिका सामने आने का दावा किया गया।
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3.22 करोड़ का स्क्रैप जब्त
पुलिस की कार्रवाई में करीब 250 टन लोहे की प्लेट, बीम कटिंग और अन्य स्क्रैप बरामद किया गया। जब्त माल की कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपये बताई गई। पुलिस ने इसे संगठित तरीके से की जा रही स्क्रैप चोरी से जोड़ते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया।
लंबे समय तक फरार रहने के बाद संजय सिंह को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया था। उस समय पुलिस ने संजय सिंह और उनके बेटे अभय सिंह की गिरफ्तारी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। अब (BSP Scrap Case) में संजय सिंह को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है।
बेटे अभय समेत कई आरोपियों को मिल चुकी जमानत
संजय सिंह के बेटे अभय सिंह का नाम भी जांच के दौरान सामने आया था। पुलिस के अनुसार मामला दर्ज होने के बाद वह फरार था। बाद में हाई कोर्ट ने उसे जांच और ट्रायल में सहयोग करने, गवाहों को प्रभावित नहीं करने और अदालत में उपस्थित रहने जैसी शर्तों के साथ जमानत दी।
व्यवसायी हिमांशु खंडेलवाल को भी हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी है। पुलिस ने उन पर कथित तौर पर स्क्रैप चोरी की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया था। (BSP Scrap Case) में आरोपियों की वास्तविक भूमिका का अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान होगा।
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BSP अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच आगे बढ़ने पर भिलाई स्टील प्लांट के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जुलाई में BSP के GM हिमांशु भूषण मलिक और AGM मनोज कुमार देवांगन को गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस ने आरोप लगाया था कि प्लांट में स्क्रैप की निगरानी और निकासी व्यवस्था में लापरवाही या मिलीभगत के कारण चोरी को अंजाम देने में मदद मिली। हालांकि, पूर्व GM हिमांशु भूषण मलिक को बाद में हाई कोर्ट से नियमित जमानत मिल गई।
हाई कोर्ट से राहत, ट्रायल में तय होगी भूमिका
संजय सिंह को जमानत मिलने के बाद उन्हें फिलहाल न्यायिक राहत मिली है। हालांकि, जमानत का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी। पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों और प्रत्येक आरोपी की भूमिका का अंतिम निर्धारण ट्रायल के दौरान पेश होने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगा। (BSP Scrap Case) में आगे की कार्रवाई और सुनवाई पर अब नजर रहेगी।
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