सीजी भास्कर, 11 सितम्बर। दुर्गा महाविद्यालय में सोमवार को बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें 500 से अधिक छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 27 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय बाल विवाह निषेध दिवस के रूप में मान्यता दिए जाने पर खुशी जताई गई। वक्ताओं ने इसे बाल विवाह के खिलाफ भारत की मुहिम और बाल अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। (Child Marriage Awareness)
कार्यक्रम की शुरुआत बाल विवाह रोकने का संदेश देने वाले पोस्टरों के विमोचन और प्रदर्शन से हुई। इस दौरान ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन’ (JRC) के प्रयासों और बाल विवाह के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा को रोकने के लिए केवल कानून ही नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी और जागरूकता भी जरूरी है।

बाल विवाह के खिलाफ दिलाई शपथ : Child Marriage Awareness
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. प्रतिभा मुखर्जी साहूकार ने JRC के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और JRC के राज्य समन्वयक विपिन ठाकुर ने बाल विवाह से होने वाले नुकसान, इससे बचाव के कानूनी प्रावधान और बच्चों के अधिकारों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाल विवाह निषेध दिवस को मिली मान्यता बाल अधिकारों की दिशा में भारत के प्रयासों को पहचान दिलाती है। जिला बाल संरक्षण इकाई के संरक्षण अधिकारी संजय निराला ने कार्यक्रम में मौजूद छात्र-छात्राओं को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई।
जागरूकता बढ़ाने पर जोर
कार्यक्रम में डॉ. सुनीता चंसोरिया, सामाजिक कार्यकर्ता गोरखनाथ पटेल और वरिष्ठ पत्रकार सरिता दुबे सहित अन्य लोग मौजूद रहे। महाविद्यालय के प्राध्यापक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भी हिस्सा लिया।
इस दौरान बाल विवाह रोकने, बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने और समाज में इसके खिलाफ जागरूकता (Child Marriage Awareness) बढ़ाने का संकल्प लिया गया।


