सीजी भास्कर, 12 सितंबर : भारत की मेजबानी में 18वें ब्रिक्स सम्मेलन का आगाज हो गया है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय बैठक में ब्रिक्स देशों के साथ साझेदार देशों के नेता और आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ ब्रिक्स सम्मेलन की शुरुआत (BRICS Summit 2026) हुई, जिसमें उन्होंने संगठन के अगले 20 वर्षों के लिए बड़े और दूरगामी लक्ष्य तय करने की जरूरत बताई।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस वर्ष का सम्मेलन ऐतिहासिक पड़ाव है, क्योंकि ब्रिक्स अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है। उन्होंने भारत की अध्यक्षता को सफल बनाने में सभी देशों के सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि 20 वर्ष की यात्रा के बाद अब संगठन को परिपक्वता और जिम्मेदारी के नए दौर में प्रवेश करना चाहिए।
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अगले 20 साल का नया एजेंडा
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब ब्रिक्स को अगले 20 वर्षों के लिए एक नए और बड़े लक्ष्य वाले एजेंडे पर काम करने की जरूरत है। इसकी शुरुआत संगठन के आंतरिक कामकाज को मजबूत करने से होनी चाहिए। अध्यक्षता हर साल बदलने के बावजूद संस्थागत काम की गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने निरंतरता बनाए रखने और फैसलों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव रखा। इसके तहत सभी पहलों और फैसलों की आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा त्रिपक्षीय व्यवस्था का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने फैसलों से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी, समय-सीमा और काम की प्रगति का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए एक डिजिटल व्यवस्था बनाने का भी सुझाव दिया। यही नए एजेंडे पर जोर (BRICS Summit 2026) सम्मेलन के प्रमुख संदेशों में शामिल रहा।
प्रतिनिधित्व और जवाबदेही पर जोर
प्रधानमंत्री ने भविष्य की रूपरेखा तैयार करते समय तीन महत्वपूर्ण पहलुओं—प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम निर्माण—पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता। इस मुद्दे पर बातचीत को निश्चित समय-सीमा और स्पष्ट परिणामों से जोड़ने की जरूरत है।
उन्होंने वैश्विक वित्तीय संस्थानों में मतदान अधिकार, नेतृत्व की भूमिका और नीतिगत प्राथमिकताओं को मौजूदा आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने की जरूरत भी बताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि जो देश वैश्विक आर्थिक विकास को गति दे रहे हैं, उन्हें वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के संचालन में भी उचित भूमिका मिलनी चाहिए। वैश्विक व्यवस्था में सुधार की पहल (BRICS Summit 2026) को उन्होंने संगठन के भविष्य से जोड़कर देखा।
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समुद्री नाविकों के लिए नई पहल
वैश्विक व्यापार में समुद्री नाविकों की भूमिका का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मुश्किल परिस्थितियों में इन्हें कई बार जरूरी सहायता नहीं मिल पाती। उन्होंने संकट के समय नाविकों की मदद के लिए आपातकालीन सहायता नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव रखा।
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इस व्यवस्था के जरिए संबंधित देशों के समुद्री अधिकारियों और राजनयिक मिशनों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित किया जा सकेगा। इससे संकट की स्थिति में समय पर सूचना, चिकित्सा सहायता, परिवारों तक जानकारी पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित निकालने में मदद मिल सकती है। वैश्विक व्यापार और मानवीय सहयोग पर जोर (BRICS Summit 2026) के तहत यह पहल अहम मानी जा रही है।
भारत की अध्यक्षता में 350 बैठकें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता लोगों को केंद्र में रखने और मानवता को प्राथमिकता देने की सोच पर आधारित रही है। मजबूती, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास भारत की प्राथमिकताओं में शामिल रहे हैं। साथ ही ब्रिक्स सहयोग को आम लोगों से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
उन्होंने बताया कि भारत की अध्यक्षता के दौरान 350 से ज्यादा बैठकें आयोजित की गईं और करीब 30 शहरों में विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत करने का अवसर मिला। दो दिवसीय सम्मेलन में अब संगठन के भविष्य, वैश्विक आर्थिक व्यवस्था, प्रतिनिधित्व और आपसी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर आगे की चर्चा होगी। ब्रिक्स की भविष्य की दिशा तय करने वाला सम्मेलन (BRICS Summit 2026) अब वैश्विक मंच पर भारत की प्राथमिकताओं को भी सामने रख रहा है।



