सीजी भास्कर, 18 सितंबर : अमेरिका ने रूस से तेल और गैस खरीदने (US Tariff News) वाले देशों पर दबाव बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस और ईरान से जुड़े नए प्रतिबंधों वाले बिल को मंजूरी दे दी है।
इसमें रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ (US Tariff News) लगाने का प्रावधान है। भारत और चीन भी इसके दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, रूसी परमाणु ईंधन को लेकर बिल में कुछ खास परिस्थितियों में छूट का प्रावधान रखा गया है।
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100% टैरिफ का प्रावधान US Tariff News
नए कानून के तहत अमेरिका उन देशों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है, जो रूस से कच्चा तेल या गैस खरीदना जारी रखते हैं। ऐसे देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ (US Tariff News) लगाया जा सकता है। इससे रूस के साथ ऊर्जा कारोबार जारी रखने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
बिल की मंजूरी के बाद रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर अमेरिका की सख्ती और बढ़ने की संभावना है। इसका असर उन देशों पर पड़ सकता है, जो रूस से तेल और गैस का आयात करते हैं। भारत और चीन का नाम भी संभावित रूप से प्रभावित देशों के तौर पर सामने आ रहा है।
रूसी यूरेनियम पर भी प्रतिबंधों का प्रावधान
बिल में रूस से आने वाले यूरेनियम को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं। इसमें रूस की सरकारी परमाणु कंपनी रोसाटॉम (Rosatom) और उससे जुड़ी कंपनियों से आने वाला यूरेनियम शामिल है। कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से यूरेनियम आयात पर मौजूदा पाबंदियों को लागू करना होगा।
परमाणु जरूरतों के लिए कुछ छूट बरकरार
हालांकि, अमेरिकी संसद ने परमाणु क्षेत्र में कुछ जरूरी जरूरतों के लिए राहत का रास्ता खुला रखा है। अमेरिका और रूस के बीच होने वाले कुछ सिविल न्यूक्लियर यानी शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग पर ये पाबंदियां लागू नहीं होंगी।
इसके अलावा कुछ परमाणु रिएक्टरों में इस्तेमाल होने वाले कम-संवर्धित यूरेनियम के आयात को भी छूट मिल सकती है। मेडिकल क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले कुछ खास आइसोटोप के आयात के लिए भी राहत का प्रावधान रखा गया है।
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ट्रंप की रणनीति में यूरेनियम के लिए खुली खिड़की
एक तरफ अमेरिका रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ (100 Percent Tariff) लगाने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ परमाणु क्षेत्र की कुछ आवश्यकताओं के लिए रूसी यूरेनियम से जुड़े रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं। इससे ऊर्जा कारोबार और परमाणु ईंधन के मामले में अमेरिकी नीति के अलग-अलग रुख सामने आते हैं।
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फिलहाल इस बिल की मंजूरी के बाद आगे की प्रक्रिया और इसके अंतिम प्रावधानों पर नजर रहेगी। यदि कानून प्रभावी होता है तो रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों के साथ अमेरिका के व्यापारिक संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है।



