सीजी भास्कर, 24 सितंबर। लगातार बारिश और खेतों में बढ़ी नमी को देखते हुए कृषि विभाग ने धान की फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन को लेकर किसानों के लिए सामयिक (Paddy Crop) सलाह जारी की है। जिले में इस खरीफ सीजन करीब 1.39 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हुई है और अधिकांश खेतों में फसल कंसे निकलने से लेकर बालियां आने की अवस्था में है।
कृषि विभाग ने किसानों से रोज खेत का निरीक्षण करने और कीट या रोग का प्रकोप दिखाई देने पर मैदानी अमले या कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से तुरंत नियंत्रण उपाय अपनाने की अपील की है।

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तना छेदक और भूरा फुदका से रहें सावधान Paddy Crop
तना छेदक के प्रकोप में बीच की कंसे सूखने लगती हैं और बाली आने के समय बालियां सफेद दिखाई दे सकती हैं। वहीं भूरा फुदका पौधे का रस चूसकर फसल को नुकसान पहुंचाता है। इसके प्रकोप में पौधे सूखने लगते हैं और हॉपर बर्न की स्थिति बन सकती है।
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कृषि विभाग ने तना छेदक, भूरा फुदका और पत्ता लपेटक जैसे कीटों के नियंत्रण के लिए अनुशंसित कीटनाशकों के इस्तेमाल की सलाह दी है। भूरा फुदका प्रभावित खेत में पानी निकालने की भी सलाह दी गई है।
ब्लास्ट और पत्ता झुलसा से भी बचाव जरूरी
ब्लास्ट रोग में पत्तियों पर आंख के आकार के धब्बे दिखाई देते हैं। वहीं जीवाणु पत्ता झुलसा में पत्तियां किनारे से पीली होकर सूखने लगती हैं। इन रोगों के लिए कृषि विभाग ने अनुशंसित फफूंदनाशकों के छिड़काव की सलाह दी है।
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कृषि विभाग ने कहा है कि कीटनाशक और फफूंदनाशक का छिड़काव सुबह या शाम ही करें। दवा की निर्धारित मात्रा का इस्तेमाल करें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। किसान अधिक जानकारी के लिए किसान कॉल सेंटर के टोल फ्री नंबर 1800-180-1551 पर संपर्क कर सकते हैं।
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रिपोर्टर – रिजवान मेमन



