सीजी भास्कर, 24 सितंबर। छत्तीसगढ़ के शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों की पेंशन को लेकर विवाद (Pension Issue) बढ़ गया है। अनुदानित शिक्षक संघ ने उच्च शिक्षा विभाग पर मंत्रिपरिषद के निर्णय की गलत व्याख्या कर पहले से मिल रही पेंशन रोकने का आरोप लगाया है।
संघ के अध्यक्ष डॉ. सुधीर शर्मा, सचिव डॉ. अनुराग पांडेय और सेवानिवृत्त प्राध्यापक संघ के प्रो. डीएन शर्मा व डॉ. आरपी अग्रवाल ने कहा कि मंत्रिपरिषद ने केवल संशोधित वेतनमान के आधार पर पेंशन देने के प्रस्ताव को अमान्य किया था। वर्तमान पेंशन बंद करने का कोई निर्देश नहीं दिया गया था।

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37 साल से मिल रही पेंशन का मुद्दा Pension Issue
संघ के अनुसार अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को करीब 37 वर्षों से पेंशन और ग्रेच्युटी दी जा रही है। 26 अक्टूबर 2010 के शासनादेश के तहत पेंशन और ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाता रहा है।
संघ का कहना है कि शिक्षकों की मांग सिर्फ इतनी थी कि जिस वेतनमान में वे सेवानिवृत्त हुए हैं, उसी के आधार पर पेंशन तय की जाए।
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जुलाई-अगस्त की पेंशन का भी भुगतान नहीं
संघ ने दावा किया कि जुलाई और अगस्त 2026 की पेंशन का भुगतान नहीं हुआ है और सितंबर से पेंशन रोक दी गई है। इससे सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है।
संघ ने सरकार से 1 और 11 सितंबर 2026 के आदेश वापस लेने, पेंशन तत्काल बहाल करने और लंबित पेंशन का भुगतान करने की मांग (Pension Issue) की है।
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संघ ने कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों की पेंशन व ग्रेच्युटी की पात्रता भी पूर्ववत रखने की मांग की है। साथ ही मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।
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