सीजी भास्कर, 6 अक्टूबर : महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति के भीतर ही घमासान शुरू हो गया है। सीटों के बंटवारे के बावजूद गठबंधन के दल आमने-सामने उतरते दिखाई दे रहे हैं। एक सीट पर सहयोगी दलों के उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला तय होता नजर आ रहा है, जबकि दूसरी सीट पर भी खींचतान बढ़ गई है।
विधान परिषद की पांच सीटों के लिए होने वाले चुनाव में बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी के बीच सहमति का फॉर्मूला पूरी तरह जमीन पर उतरता नहीं दिख रहा है। पुणे शिक्षक सीट (Maharashtra MLC Election) पर बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। वहीं पुणे ग्रेजुएट सीट पर भी बीजेपी और एनसीपी के बीच टकराव की स्थिति बन रही है।
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पांच सीटों पर चुनाव
चुनाव आयोग के मुताबिक महाराष्ट्र में दो शिक्षक और तीन ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्रों के लिए चुनाव होना है। इन पांचों सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि 27 अक्टूबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे। महायुति में सीटों का बंटवारा बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी के बीच किया गया था। बीजेपी को तीन, एकनाथ शिंदे की शिवसेना को एक और एनसीपी को एक सीट मिली है। इसके बावजूद विधान परिषद चुनाव (Maharashtra MLC Election) में गठबंधन के भीतर उम्मीदवारों को लेकर सहमति का संकट दिखाई दे रहा है।
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शिंदे के करीबी मैदान में
सबसे बड़ा पेच पुणे शिक्षक सीट पर फंसा है। एकनाथ शिंदे की शिवसेना इस सीट से अपने करीबी और OSD मंगेश चिवटे को चुनाव लड़ाना चाहती थी। चिवटे लंबे समय से इस सीट की तैयारी कर रहे थे। लेकिन बीजेपी ने यहां कौस्तुभ गावड़े को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसके बाद मुकाबला सीधे महायुति के दो घटक दलों के बीच हो गया। मंगेश चिवटे 6 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं।
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शिंदे के निर्देश का हवाला
मंगेश चिवटे का कहना है कि वह एकनाथ शिंदे के निर्देश पर ही नामांकन दाखिल कर रहे हैं। दूसरी ओर शिंदे लगातार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। शिवसेना के उम्मीदवार के मैदान में उतरने के बाद बीजेपी की ओर से अभी तक कोई बड़ा सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में महायुति की अंदरूनी खींचतान (Maharashtra MLC Election) अब खुलकर चुनावी मुकाबले में बदलती दिख रही है। पुणे शिक्षक सीट पर महाविकास आघाड़ी ने कांग्रेस नेता जयंत आसगावकर को उम्मीदवार बनाया है। इससे यहां मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
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पुणे ग्रेजुएट सीट पर भी पेच
पुणे ग्रेजुएट सीट को लेकर भी महायुति में सहमति नहीं बन पाई है। बीजेपी ने डॉ. स्मिता जाधव को उम्मीदवार बनाया है। वहीं अजित पवार की एनसीपी इस सीट पर सुनील टिंगरे को उतारने की तैयारी में है। एनसीपी इस सीट पर अपना दावा कर रही थी, लेकिन बीजेपी सीट छोड़ने को तैयार नहीं है। ऐसे में पुणे ग्रेजुएट सीट (Maharashtra MLC Election) पर भी महायुति के सहयोगी दलों के बीच मुकाबला होने की संभावना बढ़ गई है। स्मिता जाधव कोल्हापुर से आती हैं। वह ‘पुढारी मीडिया ग्रुप’ के मालिक प्रतापसिंह जाधव की बहू और डी. वाय. पाटील विद्यापीठ के कुलगुरु पी.डी. पाटील की बेटी हैं। वह डी. वाय. पाटील विद्यापीठ में प्र-कुलगुरु के पद पर भी कार्यरत हैं।
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नागपुर में भी बगावत
नागपुर ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र में भी बीजेपी के सामने अंदरूनी चुनौती खड़ी हो गई है। पार्टी ने सुधाकर कोहळे को आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है, लेकिन बीजेपी नेता अनिल सोले भी इस सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे। पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बाद अनिल सोले अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। इससे बीजेपी के सामने अपने ही खेमे में बगावत रोकने की चुनौती खड़ी हो गई है। वहीं कांग्रेस ने मौजूदा विधायक अभिजित वंजारी को दोबारा मैदान में उतारा है। नागपुर ग्रेजुएट सीट (Maharashtra MLC Election) पर मुकाबला बीजेपी के अधिकृत उम्मीदवार, संभावित बागी और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय हो सकता है।
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58 साल बाद बदला समीकरण
नागपुर ग्रेजुएट सीट का राजनीतिक इतिहास बीजेपी के लिए खास रहा है। अभिजित वंजारी ने 2020 में यह चुनाव जीतकर बीजेपी के लंबे वर्चस्व को खत्म किया था। इससे पहले करीब 58 साल तक इस सीट पर बीजेपी का दबदबा रहा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पिता गंगाधरराव फडणवीस भी इसी सीट से विधान परिषद पहुंचे थे। उन्होंने 1978 से 1988 तक इसका प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी ने 1990 से 2014 तक लगातार चार बार नागपुर ग्रेजुएट सीट का प्रतिनिधित्व किया। अब एक बार फिर इस सीट पर बीजेपी के सामने अंदरूनी चुनौती के साथ कांग्रेस की मजबूत मौजूदगी है।
पांच सीटों पर नजर
महाराष्ट्र विधान परिषद की इन पांच सीटों का चुनाव महायुति के लिए केवल सीट जीतने की लड़ाई नहीं है। पुणे शिक्षक सीट पर बीजेपी और शिंदे की शिवसेना आमने-सामने हैं, जबकि पुणे ग्रेजुएट सीट पर बीजेपी और अजित पवार की एनसीपी के बीच टकराव के आसार हैं। नागपुर में बीजेपी के भीतर संभावित बगावत ने भी पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में महायुति का चुनावी संकट (Maharashtra MLC Election) इन पांच सीटों के नतीजों के साथ-साथ गठबंधन के अंदर भविष्य के समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।
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