सीजी भास्कर, 23 अक्टूबर। भारत में कार खरीदने वालों की पसंद तेजी से बदल (Indian Auto Industry) रही है। अब ग्राहक सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों को भी विकल्प के रूप में देख रहे हैं। बदलती मांग को देखते हुए ऑटो कंपनियां भी अपनी रणनीति में बदलाव कर रही हैं।

पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी में गिरावट Indian Auto Industry
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में कुल कार बिक्री में पेट्रोल मॉडल की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत रही, जबकि सितंबर 2025 में यह 47 प्रतिशत थी। दूसरी ओर, सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों की संयुक्त हिस्सेदारी 35 प्रतिशत से बढ़कर 41 प्रतिशत हो गई। यह बदलाव ग्राहकों की बदलती पसंद को दर्शाता है।
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कंपनियां बढ़ा रहीं विकल्प
रेनो, फॉक्सवैगन और स्टेलेंटिस जैसी कंपनियां भारतीय बाजार में अलग-अलग पावरट्रेन विकल्पों पर ध्यान दे रही हैं। वहीं, महिंद्रा पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक एसयूवी के साथ सीएनजी सेगमेंट में भी संभावनाएं बढ़ा रही है। टोयोटा भी अलग-अलग बाजारों की जरूरतों के अनुसार विभिन्न तकनीकों पर काम कर रही है।
कार खरीदने से पहले इन बातों पर दें ध्यान
सीएनजी कारें ईंधन खर्च कम करने में मदद कर सकती हैं, जबकि हाइब्रिड कारों में पेट्रोल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक तकनीक का इस्तेमाल होता है। इलेक्ट्रिक कारें बैटरी से चलती हैं। ऐसे में गाड़ी खरीदते समय कीमत के साथ रोजाना चलने की दूरी, ईंधन की उपलब्धता, चार्जिंग सुविधा और रखरखाव का खर्च देखना जरूरी है।
कुल मिलाकर, भारतीय ऑटो बाजार में अब ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से विकल्प देने की होड़ बढ़ रही है। आने वाले समय में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।
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