सीजी भास्कर, बिलासपुर, 30 अक्टूबर। बिलासपुर के बहुचर्चित संजू त्रिपाठी हत्याकांड (Sanju Tripathi Murder Case) में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 22 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इस मामले में पुलिस ने संजू के भाई कपिल त्रिपाठी को मुख्य आरोपी बताते हुए संपत्ति विवाद और पुरानी रंजिश को हत्या की साजिश की वजह बताया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित नहीं कर सका।
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सकरी बायपास पर दिनदहाड़े हत्या
14 दिसंबर 2022 को कुदुदंड निवासी संजू त्रिपाठी की सकरी बायपास के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के समय संजू अपनी कार में सवार था। इसी दौरान हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं और मौके से फरार हो गए। दिनदहाड़े हुई इस वारदात से शहर में सनसनी फैल गई थी। पुलिस ने जांच के दौरान उत्तर प्रदेश के शूटरों और स्थानीय लोगों की भूमिका सामने आने का दावा किया था।
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संपत्ति विवाद को माना था वजह
पुलिस की जांच में संजू त्रिपाठी और उसके भाई कपिल त्रिपाठी के बीच संपत्ति के बंटवारे और वर्चस्व को लेकर विवाद की बात सामने आई थी। पुलिस ने इसी रंजिश को हत्या की साजिश की वजह बताते हुए कपिल को मुख्य आरोपी बनाया था। जांच के बाद इस मामले में कुल 22 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया गया।
चश्मदीद गवाहों से कमजोर पड़ा पक्ष
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को सबसे बड़ा झटका चश्मदीद गवाहों के बयानों से लगा। पुलिस ने इस मामले में दो प्रमुख चश्मदीद गवाह बनाए थे। इनमें से एक की अदालत में गवाही दर्ज ही नहीं हो सकी, जबकि दूसरा गवाह अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गया। इसके अलावा आरोपियों को हत्या से जोड़ने वाले तकनीकी, फॉरेंसिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए। ऐसे में अभियोजन पक्ष का मामला अदालत में कमजोर पड़ गया।
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साक्ष्य नहीं मिले, सभी 22 आरोपी बरी
दोनों पक्षों की दलीलों और पेश किए गए साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित करने में सफल नहीं रहा। इसी आधार पर सभी 22 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया। इस फैसले के साथ ही दिसंबर 2022 में हुई संजू त्रिपाठी की हत्या के मामले में निचली अदालत की सुनवाई पूरी हुई। अदालत के फैसले का आधार अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाना रहा।
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