सीजी भास्कर, 2 नवंबर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी आज किसानों की आय और प्रदेश की राजनीति का बड़ा (Chhattisgarh Paddy Procurement) केंद्र है। लेकिन इस व्यवस्था की शुरुआत आसान नहीं थी। राज्य गठन के शुरुआती दौर में किसानों को धान बेचने के लिए मंडियों में 8 से 10 दिन इंतजार करना पड़ता था। इसी परेशानी को दूर करने समर्थन मूल्य पर खरीदी का मॉडल तैयार हुआ। इस व्यवस्था को लेकर केंद्र से टकराव हुआ और तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के नेतृत्व में पूरा मंत्रिमंडल दिल्ली तक पहुंचा था।
पूर्व खाद्य मंत्री मोहम्मद अकबर ने धान खरीदी के इस सफर से जुड़े अनुभव साझा किए। शुरुआती सहकारी मॉडल से लेकर आज 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर तक पहुंची व्यवस्था में कई राजनीतिक फैसले और बदलाव शामिल रहे।

सहकारी समितियों से शुरू हुआ मॉडल Chhattisgarh Paddy Procurement
1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य बना। किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए तत्कालीन सरकार ने सहकारी समितियों के जरिए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का प्रस्ताव तैयार किया। करीब 1,335 समितियों के माध्यम से गांवों के पास ही खरीदी केंद्र खोलने की योजना बनी।
धान से तैयार चावल नागरिक आपूर्ति निगम और भारतीय खाद्य निगम में जमा कराया जाना था। लेकिन शुरुआती दौर में भारतीय खाद्य निगम ने छत्तीसगढ़ का चावल लेने से इनकार कर दिया।
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चावल लेने के मुद्दे पर दिल्ली पहुंचे थे मंत्रिमंडल
तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के नेतृत्व में मंत्रिमंडल दिल्ली पहुंचा और केंद्रीय पूल में चावल लेने तथा धान खरीदी के लिए सहायता (Chhattisgarh Paddy Procurement) की मांग की। मोहम्मद अकबर के मुताबिक, इस दौरान मंत्रिमंडल ने धरना दिया और अजीत जोगी समेत मंत्रियों की गिरफ्तारी भी हुई। बाद में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात कर प्रदेश की मांग रखी गई।
बोनस ने बनाया बड़ा राजनीतिक मुद्दा
2003 में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने भी धान खरीदी जारी रखी। 2008 के चुनाव में बोनस का वादा किया गया। बाद में किसानों को 220 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मिला, जिसे बढ़ाकर 270 और फिर 300 रुपये किया गया।
केंद्र के निर्देशों के बाद 2014-15 और 2015-16 में बोनस बंद रहा। इसके बाद 2016-17 और 2017-18 में फिर 300 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया गया।
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2500 रुपये से 3100 रुपये तक पहुंचा भुगतान
2018 में कांग्रेस ने 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने का वादा किया। भूपेश बघेल सरकार ने समर्थन मूल्य के अतिरिक्त अंतर की राशि किसानों तक पहुंचाने के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरू की।
2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 3100 रुपये प्रति क्विंटल और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक खरीदी का वादा किया। विष्णुदेव साय सरकार ने कृषक उन्नति योजना के जरिए इस दर पर भुगतान की व्यवस्था की।
खरीदी का आंकड़ा एक करोड़ मीट्रिक टन के पार
धान खरीदी का दायरा भी लगातार बढ़ा। वर्ष 2022-23 में खरीदी 107 लाख मीट्रिक टन से अधिक पहुंच गई। वहीं, खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में करीब 24.72 लाख किसानों से 144.92 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया।
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इस तरह सहकारी समितियों से शुरू हुई व्यवस्था आज किसानों की आय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और छत्तीसगढ़ की राजनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है।
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