सीजी भास्कर, अंबिकापुर, 3 नवंबर 2026। सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम बगदरी की अश्वनी राजवाड़े आज खीरे की खेती से अच्छी आमदनी कर रही हैं। महिला स्व-सहायता समूह (Lakhpati Didi Ashwani Rajwade) से डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने ढाई एकड़ में खेती शुरू की। मेहनत और अच्छी पैदावार ने उनकी आर्थिक स्थिति बदल दी। अब उनके खेत का खीरा बिहार तक पहुंच रहा है और गांव के 20 से 25 लोगों को रोजाना रोजगार भी मिल रहा है।

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समूह के ऋण से शुरुआत
अश्वनी राजवाड़े दीप्ति महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं। बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें खेती-किसानी के लिए आर्थिक सहयोग मिला। उन्होंने समूह से डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर ढाई एकड़ जमीन पर खीरे की खेती शुरू की। अश्वनी के मुताबिक, पहले पूंजी की कमी के कारण खेती का विस्तार करना मुश्किल था। जरूरत के समय ऋण की व्यवस्था करने में भी परेशानी होती थी। समूह के माध्यम से आर्थिक सहयोग मिलने पर उन्होंने खेती में निवेश किया। इस साल अच्छी पैदावार हुई है और फिलहाल फसल की तुड़ाई जारी है।
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बिहार तक पहुंच रहा खीरा
अश्वनी की खेती अब व्यावसायिक रूप ले चुकी है। खीरे की अच्छी गुणवत्ता और पैदावार के कारण व्यापारी खुद उनके पास पहुंचकर उपज खरीद रहे हैं। उन्हें खीरा बेचने के लिए बाजार तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। उनके खेत से निकला खीरा बिहार तक भेजा जा रहा है। घर से ही बिक्री होने के कारण बाजार तक उपज पहुंचाने की परेशानी भी कम हुई है। इससे उन्हें खेती से अच्छी आमदनी मिल रही है।
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गांव के 25 लोगों को रोजगार
अश्वनी की सफलता केवल उनकी आमदनी तक सीमित नहीं है। उनकी ढाई एकड़ की खेती में फसल की देखरेख, तुड़ाई और दूसरे कृषि कार्यों के लिए गांव के 20 से 25 लोगों को प्रतिदिन रोजगार मिल रहा है। अश्वनी का कहना है कि अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ गांव के लोगों को काम उपलब्ध करा पाना उनके लिए खुशी की बात है। खेती के जरिए वे दूसरे परिवारों की आजीविका में भी योगदान दे रही हैं।
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बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान
अश्वनी के पति भी खेती-किसानी करते हैं। दोनों मिलकर कृषि कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर होने से अब वे अपने दोनों बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ा पा रही हैं। अश्वनी बताती हैं कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें खेती के विस्तार और स्वरोजगार का अवसर मिला। अब वे परिवार के आर्थिक फैसलों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे समाज में उनका सम्मान बढ़ा है।
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दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा
स्व-सहायता समूह से मिले ऋण और अपनी मेहनत के दम पर अश्वनी लखपति दीदी बनी हैं। खीरे की खेती से आमदनी के साथ गांव में रोजगार के अवसर तैयार करना उनकी उपलब्धि है। उन्होंने अपनी सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। अश्वनी की कहानी बताती है कि समूह के माध्यम से मिलने वाला आर्थिक सहयोग और स्वरोजगार ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकता है।
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