सीजी भास्कर, 10 सितंबर : छत्तीसगढ़ में आदिवासी जमीन के बेनामी हस्तांतरण (Adivasi Land Benami) पर अब सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। गैर-आदिवासियों द्वारा सीधे जमीन अपने नाम खरीदने के बजाय नौकर, रिश्तेदार, परिचित या किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जमीन लेने और बाद में उस पर खुद कब्जा या आर्थिक नियंत्रण रखने के मामलों की जांच होगी। कानून के विपरीत सौदा मिलने पर जमीन को दोबारा आदिवासी खातेदार के नाम बहाल करने की कार्रवाई भी की जा सकेगी।
यह फैसला छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के प्रस्ताव के बाद लिया गया है। आयोग ने शासन के सामने ऐसी शिकायतों और मामलों को लेकर चिंता जताई थी, जिनमें आदिवासी भूमि के अप्रत्यक्ष हस्तांतरण (Adivasi Land Benami) की आशंका सामने आई। इसके बाद महानिरीक्षक पंजीयन ने कलेक्टरों को पत्र जारी कर संदिग्ध जमीन सौदों की जांच और पंजीयन प्रक्रिया में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
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नौकर-रिश्तेदार के नाम जमीन पर जांच
जिला प्रशासन को ऐसे मामलों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां जमीन आदिवासी खातेदार से किसी नौकर, परिचित, रिश्तेदार या दूसरे व्यक्ति के नाम खरीदी गई हो, लेकिन जमीन का वास्तविक इस्तेमाल, कब्जा या उससे मिलने वाला आर्थिक लाभ किसी गैर-आदिवासी के पास हो।
ऐसे मामलों में संदिग्ध जमीन सौदों की जांच (Adivasi Land Benami) कराई जाएगी। जांच पूरी होने तक नियमों के तहत संबंधित जमीन के आगे हस्तांतरण पर रोक भी लगाई जा सकती है। प्रशासन को यह भी देखना होगा कि जमीन के दस्तावेजों में दर्ज खरीदार और वास्तविक लाभ लेने वाले व्यक्ति के बीच कोई अप्रत्यक्ष संबंध तो नहीं है।
रजिस्ट्री से पहले होगी बारीकी से जांच
शासन ने पंजीयन अधिकारियों को रजिस्ट्री के दौरान दस्तावेजों की गंभीरता से जांच करने को कहा है। रजिस्ट्रीकरण अधिनियम की धारा 34 और 35 तथा संबंधित पंजीयन नियमों के तहत दस्तावेजों की जांच, संपत्ति की पहचान और क्रेता-विक्रेता के साथ गवाहों की सही शिनाख्त सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा पंजीयन के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों में जमीन की पहचान से जुड़े आवश्यक नक्शे और रेखांकन की भी जांच होगी। आदिवासी जमीन की रजिस्ट्री (Adivasi Land Benami) में किसी तरह की शंका सामने आने पर संबंधित राजस्व अभिलेखों और तहसील स्तर से जानकारी का सत्यापन कराने पर जोर दिया गया है।
छोटे भूखंडों पर भी रहेगी नजर
शासन ने छोटे-छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री के मामलों में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। राजस्व अभिलेख, बिक्री नकल और जमीन से संबंधित दूसरे दस्तावेजों का सूक्ष्म परीक्षण किया जाएगा। दस्तावेजों में किसी तरह की विसंगति या संदेह होने पर तहसीलदार से संपर्क कर रिकॉर्ड की पुष्टि करने को कहा गया है।
प्रशासन की नजर केवल जमीन के खरीदार पर ही नहीं, बल्कि दस्तावेज तैयार कराने और पहचान संबंधी प्रक्रिया पर भी रहेगी। जमीन हस्तांतरण में गड़बड़ी (Adivasi Land Benami) रोकने के लिए दस्तावेजों में वास्तविक पक्षकारों और उनकी पहचान की पुष्टि को महत्वपूर्ण माना गया है।
एक ही गवाह पर बार-बार सवाल
शासन के संज्ञान में ऐसे मामले भी आए हैं, जहां अलग-अलग दस्तावेजों में एक ही व्यक्ति बार-बार गवाह या पहचानकर्ता के रूप में सामने आया। इसे गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को गवाहों की पहचान में पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्देशों के मुताबिक केवल सही और वास्तविक पहचानकर्ता को ही गवाह के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। इस प्रक्रिया में लापरवाही सामने आने पर रजिस्ट्री प्रक्रिया में सख्ती (Adivasi Land Benami) बढ़ाने की जरूरत बताई गई है।
गलत सौदा मिला तो जमीन होगी वापस
सरकार की कार्रवाई का दायरा केवल भविष्य में होने वाले लेन-देन तक सीमित नहीं रहेगा। पुराने संदिग्ध हस्तांतरणों की भी जांच की जाएगी। यदि जांच में कोई सौदा कानून के विपरीत पाया जाता है, तो संबंधित जमीन को नियमानुसार दोबारा आदिवासी खातेदार के पक्ष में बहाल किया जा सकता है।
इसके साथ ही शिकायतों की समयबद्ध जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तर पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। आदिवासी जमीन संरक्षण (Adivasi Land Benami) को लेकर उठाया गया यह कदम जमीन के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष हस्तांतरण पर प्रशासनिक निगरानी बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
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