सीजी भास्कर, 21 अगस्त। आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में बैंक फ्रॉड का बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से 24.81 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगा है. सीबीआई-एसीबी विशाखापट्टनम ने इस मामले में ओमकारा विजयालक्ष्मी स्ट्रिप्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज की है. धोखाधड़ी में कंपनी के निदेशकों समेत अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी लोगों को आरोपी बनाया गया है. एफआईआर में इनलोगों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. (CBI Bank Fraud Case)
दरअसल, कंपनी ने साल 2024 में यूनियन बैंक से करीब 24.98 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधा ली थी. आरोप है कि लोन लेने के लिए फर्जी/गलत वित्तीय दस्तावेज और बढ़ा-चढ़ाकर स्टॉक और बुक डेट्स दिखाए गए, लेकिन बैंक जांच में घोषित स्टॉक और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर सामने आया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 मई 2025 को स्टॉक करीब 23.86 करोड़ रुपये बताया गया, जबकि 27 जून 2025 के निरीक्षण में वास्तविक स्टॉक सिर्फ करीब 25 लाख रुपये मिला.
टर्नओवर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप : CBI Bank Fraud Case
बैंक के मुताबिक, बुक डेट्स के समर्थन में जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए. आरोप है कि लोन की रकम को अलग-अलग खातों और संस्थाओं के जरिए डायवर्ट और साइफन किया गया. जांच में मारुति ट्रेडर्स (Maruthi Traders) और श्री दुर्गा भवानी स्टील्स के साथ संदिग्ध लेनदेन की बात सामने आई. बैंक जांच में इन संस्थाओं के जरिए कारोबार और टर्नओवर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप है.
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पिछले साल NPA घोषित हुआ खाता
दो निदेशकों के लोन मंजूर होने के 6 महीने के भीतर इस्तीफा देने की बात भी FIR में दर्ज है. बैंक के अनुसार, खाता 23 जून 2025 को NPA घोषित हुआ. एनपीए के समय कंपनी पर करीब 26.05 करोड़ रुपये की बकाया देनदारी थी. बैंक की फ्रॉड मैनेजमेंट ग्रुप ने जांच के बाद खाते को फ्रॉड के रूप में वर्गीकृत किया.
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बैंक ने 1 जून को RBI को दी फ्रॉड की जानकारी : CBI Bank Fraud Case
इस मामले में 1 जून 2026 को बैंक ने 24.81 करोड़ रुपये के फ्रॉड की जानकारी RBI को दी थी. फिलहाल मामले में बैंक के सार्वजनिक धन को कथित तौर पर डायवर्ट और दुरुपयोग करने के आरोपों की जांच जारी है. एफआईआर में आरोपियों के खिलाफ आईपीसी, बीएनएस और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं.
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