सीजी भास्कर, महासमुंद, 03 नवंबर। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के पटेवा क्षेत्र में चक्रवाती बारिश (Cyclonic Rain Paddy Crop Damage) ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अर्णब चक्रवात के बाद अब मुरासु चक्रवात के प्रभाव से मौसम का मिजाज बिगड़ गया है। सोमवार को दिनभर आसमान में बादल छाए रहे और हल्की बूंदाबांदी होती रही। बारिश और तेज हवाओं के कारण पककर तैयार अर्ली वैरायटी की धान की फसल खेतों में जमीन पर गिर गई है। कई खेतों में फसल चटाई की तरह बिछी नजर आ रही है।
यह भी पढ़ें : पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह आज, राज्यपाल देंगे विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल
खेतों में बिछी धान की फसल
पटेवा क्षेत्र में लगातार खराब मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में पककर तैयार हो चुकी अर्ली वैरायटी की धान की फसल बारिश और तेज हवाओं की चपेट में आकर जमीन पर गिर गई। तस्वीरों में भी खेतों में धान की फसल बड़े हिस्से में बिछी दिखाई दे रही है। किसानों का कहना है कि चक्रवाती बारिश से पहले ही फसल को नुकसान पहुंच चुका है। अब लगातार मौसम बदलने से कटाई और मिंजाई का काम प्रभावित हो रहा है। खेतों में पानी और नमी बने रहने के कारण फसल को सुरक्षित निकालना मुश्किल हो गया है।
यह भी पढ़ें : छत्तीसगढ़ में मुरासु तूफान का असर, दो दिन बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट; 19 जिलों में आज चेतावनी
दानों के खराब होने का डर
मौसम की मार से केवल खेतों में खड़ी फसल ही प्रभावित नहीं हुई है। जिन किसानों ने धान काट लिया है, वे भी उसे सुरक्षित स्थान पर एकत्रित नहीं कर पा रहे हैं। खेतों में लगातार नमी रहने से धान के दानों के काले पड़ने और अंकुरित होने की आशंका है। इससे उत्पादन और फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। अर्ली वैरायटी के साथ हारुना धान की कटाई में भी देरी हो रही है। किसानों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती खेतों में पड़ी फसल को जल्द से जल्द सुरक्षित रखने की है। यदि मौसम का मिजाज इसी तरह बना रहा, तो नुकसान और बढ़ने की आशंका है।
यह भी पढ़ें : छत्तीसगढ़ में स्टेट टैक्स इंस्पेक्टर भर्ती रद्द करने का फैसला बरकरार, हाईकोर्ट ने याचिकाएं खारिज कीं
दीपावली की खुशियों पर मार
सामने दीपावली का त्योहार है, लेकिन फसल खराब होने की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में बर्बाद होती फसल देखकर किसानों के घरों में त्योहार की खुशियां भी फीकी पड़ती नजर आ रही हैं। खेती पर निर्भर परिवारों के लिए यह समय आर्थिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
दीपावली, दीपोत्सव और गोवर्धन पूजा के अवसर पर गौमाता को नए चावल खिलाने की परंपरा निभाई जाती है। लेकिन फसल की कटाई में देरी और नुकसान की आशंका के कारण इस बार किसान चिंतित हैं। पटेवा क्षेत्र में (Cyclonic Rain Paddy Crop Damage) से प्रभावित खेतों को देखकर किसानों को अपनी मेहनत और लागत दोनों की चिंता सता रही है।
यह भी पढ़ें : SIR Voter List Revision : पांच चुनावी राज्यों में SIR के बाद 2.29 करोड़ मतदाताओं के नाम हटे, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा असर
किसानों ने मांगा मुआवजा
पटेवा क्षेत्र के किसानों ने शासन-प्रशासन से प्रभावित फसलों का जल्द सर्वे कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि चक्रवाती बारिश और तेज हवाओं से हुए नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों के मुआवजा प्रकरण तत्काल तैयार किए जाएं। पात्र किसानों को जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक संकट से राहत मिल सके। किसानों के मुताबिक, खेती उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। ऐसे में मौसम की मार से फसल को हुए नुकसान की भरपाई के लिए शासन की ओर से समय पर सहायता मिलना जरूरी है। अब किसानों की नजर प्रशासन की सर्वे प्रक्रिया और मुआवजे से जुड़े फैसले पर है। प्रभावित किसानों को उम्मीद है कि जल्द नुकसान का आकलन कर उन्हें राहत पहुंचाई जाएगी।



