सीजी भास्कर, 22 सितंबर : गरियाबंद जिले के बिन्द्रानवागढ़-सातधार मार्ग पर करीब 18 साल पुराना रपटा पुल बारिश के कारण धंस गया है। रपटा पुल (Gariaband Bridge Collapse) के क्षतिग्रस्त होने से दर्जनों गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क प्रभावित हो गया है। रास्ता बंद होने से ग्रामीणों को स्कूल, अस्पताल और रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लगातार बारिश के बाद करीब एक सप्ताह पहले रपटा धंस गया। इसके बाद इस मार्ग से बड़े वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है। सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों और गर्भवती महिलाओं को हो रही है। एंबुलेंस के गांव तक नहीं पहुंच पाने के कारण मरीजों को खाट पर रखकर या पैदल मुख्य मार्ग तक ले जाने की स्थिति बन गई है।
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स्कूल जाने वाले बच्चों की बढ़ी परेशानी
रास्ता बंद होने से क्षेत्र के स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। तेज बहाव और क्षतिग्रस्त मार्ग के कारण ग्रामीणों को आवाजाही के दौरान जोखिम उठाना पड़ रहा है। कई स्थानों पर रास्ता बेहद खराब होने के कारण दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान रपटा पहले भी परेशानी का कारण बनता रहा है। इस बार स्थिति ज्यादा गंभीर हो गई है, क्योंकि पुल धंसने के बाद दर्जनों गांवों का सीधा संपर्क प्रभावित हुआ है।
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मरीजों को खाट पर ले जाने की नौबत
रास्ता बंद होने का सबसे गंभीर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पा रही है। ऐसे में गंभीर मरीजों को खाट पर रखकर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ रहा है। गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में भी परिजनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक यदि जल्द वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं की गई तो किसी आपात स्थिति में बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराने की मांग की है।
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18 साल पहले बना था रपटा
ग्रामीणों के अनुसार बिन्द्रानवागढ़-सातधार मार्ग पर यह रपटा करीब 18 वर्ष पहले बनाया गया था। ग्राम पंचायत पतोरा के सरपंच कृष्णकुमार नाग के मुताबिक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत इसके निर्माण में 50 लाख रुपए से अधिक खर्च किए गए थे। समय बीतने के साथ रपटा धीरे-धीरे कमजोर होता गया। ग्रामीणों का दावा है कि इसकी स्थिति की जानकारी संबंधित विभाग को दी गई थी, लेकिन समय रहते आवश्यक मरम्मत नहीं कराई गई।
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लगातार बारिश से धंसा रपटा
करीब एक सप्ताह पहले लगातार बारिश के बाद रपटा अचानक धंस गया। इसके बाद पाराटोला क्षेत्र समेत आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया। क्षतिग्रस्त रपटा (Gariaband Bridge Collapse) अब ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ मौजूदा रपटे की मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी। भविष्य में यहां मजबूत और बड़े पुल का निर्माण किया जाना चाहिए, ताकि हर बारिश में संपर्क टूटने की समस्या से राहत मिल सके।
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प्रशासन ने लगाया चेतावनी बोर्ड
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना गरियाबंद के कार्यपालन अभियंता राहुल चंद्राकर ने बताया कि बारिश के कारण रपटा धंस गया है और फिलहाल मार्ग पर आवागमन बंद है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दोनों तरफ जिला प्रशासन की ओर से चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। अधिकारी के मुताबिक रपटा पुल का निर्माण विभाग या ग्राम पंचायत में से किसके माध्यम से कराया गया था, इसकी जानकारी संबंधित फाइल देखने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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ग्रामीणों ने मांगी अस्थायी व्यवस्था
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि स्थायी पुल के निर्माण में समय लग सकता है, इसलिए फिलहाल अस्थायी रपटा या सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग बनाया जाए। ग्रामीणों की मांग है कि पुल टूटने की समस्या (Gariaband Bridge Collapse) का स्थायी समाधान किया जाए, ताकि बच्चों को स्कूल, मरीजों को अस्पताल और ग्रामीणों को जरूरी कामों के लिए जोखिम उठाकर आवागमन न करना पड़े।
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बारिश ने खोली पुराने निर्माण की पोल
18 साल पुराने रपटे के धंसने के बाद निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते मरम्मत और मजबूतकरण का काम कराया जाता तो आज दर्जनों गांवों के सामने संपर्क टूटने की स्थिति नहीं बनती। फिलहाल प्रशासन ने रास्ते पर चेतावनी बोर्ड लगाकर आवाजाही रोक दी है। अब ग्रामीणों की नजर वैकल्पिक व्यवस्था और स्थायी पुल निर्माण को लेकर होने वाली कार्रवाई पर है।



