सीजी भास्कर, 12 सितंबर : छत्तीसगढ़ में जमीन के इस्तेमाल से जुड़े नियमों को लेकर सरकार बड़ा बदलाव (Land Use Rules Chhattisgarh) करने जा रही है। विकास गतिविधियों को गति देने और भूमि उपयोग की प्रक्रियाओं को सरल, स्पष्ट एवं व्यावहारिक बनाने के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित भूमि उपयोग व्यवस्था में प्रतिबंधित गतिविधियों की स्पष्ट सूची तय करने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा अन्य गतिविधियों के लिए अनावश्यक नियामकीय बाधाएं कम करने का प्रस्ताव है।
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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का लगातार प्रयास है कि नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए। भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित बदलाव इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे बदलती जरूरतों के अनुसार विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी तथा प्रदेश में निवेश, रोजगार और अधोसंरचना विकास को गति मिलेगी।
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जमीन के नियम होंगे आसान
आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नियमन को समाप्त करना नहीं, बल्कि उसे अधिक स्पष्ट, सरल, लचीला और परिणामोन्मुख बनाना है। प्रस्तावित व्यवस्था में किन गतिविधियों पर रोक रहेगी, इसे स्पष्ट रूप से तय किया जाएगा। इसके अलावा जिन गतिविधियों पर रोक नहीं होगी, उनके लिए अनावश्यक बाधाएं कम करने का रास्ता तैयार किया जाएगा।
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मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत विजन 2047 के अनुरूप छत्तीसगढ़ लगातार नीतिगत सुधार कर रहा है। पिछले दो वर्षों में ग्रामीण और शहरी विकास को गति देने के लिए कई सुधार किए गए हैं। प्रस्तावित भूमि उपयोग नियम (Land Use Rules Chhattisgarh) में बदलाव से प्रदेश के आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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प्रतिबंधित गतिविधियां होंगी तय
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों में केवल निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जाएगा। जिन गतिविधियों को प्रतिबंधित सूची में शामिल नहीं किया जाएगा, उन्हें अनुमत माना जाएगा। इससे वर्तमान के साथ भविष्य में विकसित होने वाली नई गतिविधियों के लिए भी अधिक अवसर उपलब्ध होंगे।
प्रस्ताव में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद तथा कृषि भूमि उपयोग के लिए अलग-अलग प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची निर्धारित की गई है। इससे प्रत्येक क्षेत्र की प्रकृति, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और विकास की जरूरतों के अनुसार स्पष्ट व्यवस्था तैयार होगी।
आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षा पहले
आवासीय भूमि उपयोग के अंतर्गत प्रदूषणकारी उद्योगों, बड़े भंडारण, कबाड़खानों, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन एवं मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार स्थल, कब्रिस्तान तथा खनन जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है।
इसका उद्देश्य आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा, पर्यावरणीय गुणवत्ता और बेहतर जीवन-परिस्थितियों को बनाए रखना है। वहीं वाणिज्यिक भूमि उपयोग में नारंगी, लाल एवं नीली श्रेणी के उद्योगों, खतरनाक एवं विषाक्त रसायनों तथा विस्फोटक पदार्थों के भंडारण सहित पशुपालन, मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार स्थल, कब्रिस्तान तथा खनन गतिविधियों को निषिद्ध करने का प्रस्ताव है।
उद्योगों के लिए भी साफ नियम
औद्योगिक भूमि उपयोग में पूर्णतः आवासीय नगर, अनुमत कर्मचारी आवास को छोड़कर छात्रावास एवं शयनागार, विद्यालय, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और असंगत गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है।
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कृषि भूमि उपयोग में आवासीय अभिन्यास, किफायती जन आवास एवं एकीकृत उपनगर को छोड़कर बड़े वाणिज्यिक परिसर, खतरनाक वाणिज्यिक उपयोग, विभिन्न श्रेणी के उद्योग, उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाएं तथा बड़े मॉल जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है।
इसी तरह सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन तथा आमोद-प्रमोद भूमि उपयोग के लिए भी असंगत, प्रदूषणकारी, खतरनाक एवं अत्यधिक भारी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया जाएगा।
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नई गतिविधियों के लिए खुलेगा रास्ता
तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के साथ नई सेवाओं, संस्थाओं, व्यवसायों और तकनीकी गतिविधियों के स्वरूप भी लगातार विकसित हो रहे हैं। ऐसे में पहले से तय गतिविधियों की लंबी सूची के बजाय स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित गतिविधियों के आधार पर नियमन करने से नई और उभरती गतिविधियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
प्रस्तावित व्यवस्था भूमि उपयोग नियमों (Land Use Rules Chhattisgarh) के तहत अनावश्यक अनुपालन बोझ कम करने के साथ विकास परियोजनाओं को गति देने में मदद करेगी। साथ ही निवेशकों के लिए नियम अधिक स्पष्ट और पूर्वानुमानित होंगे। इससे प्रदेश के शहरों और कस्बों में नियोजित विकास को बढ़ावा देने के साथ आवास, व्यापार, सेवाओं और अधोसंरचना से जुड़ी बदलती जरूरतों को पूरा करने में सुविधा होगी।
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15 दिन में दर्ज करा सकेंगे आपत्ति
प्रस्तावित संशोधन पर नागरिकों एवं संबंधित पक्षों से आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 15 दिवस की अवधि में प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर शासन द्वारा विचार किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियमों में प्रस्तावित संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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सरकार का मानना है कि भूमि उपयोग नियमों में यह बदलाव भूमि उपयोग व्यवस्था (Land Use Rules Chhattisgarh) को अधिक लचीला और व्यावहारिक बनाएगा। इससे विकास कार्यों में अनावश्यक अड़चनें कम होंगी, निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार होगा और प्रदेश की बदलती विकास जरूरतों के अनुसार नियोजन व्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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