सीजी भास्कर, 13 सितंबर : सिहावा की पूर्व विधायक डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता (Smart Meter Sihawa) खत्म करने की मांग उठाई है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार से जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट मीटर को अनिवार्य करने के बजाय इसे उपभोक्ताओं के लिए वैकल्पिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि गांव-गांव में जनसंपर्क के दौरान गरीब, मजदूर और मध्यम वर्ग के लोगों में स्मार्ट मीटर को लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है।
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डॉ. लक्ष्मी ध्रुव के अनुसार कई उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली का बिल पहले की तुलना में ज्यादा आने लगा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ परिवारों का मासिक बजट बिजली बिल बढ़ने से प्रभावित हुआ है। हालांकि बिजली बिल बढ़ने और मीटर की रीडिंग को लेकर लगाए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
स्मार्ट मीटर पर लोगों की शिकायत
डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने कहा कि जनसंपर्क के दौरान कई लोगों ने स्मार्ट मीटर को लेकर अपनी शिकायतें साझा की हैं। उनके मुताबिक कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि घर के बिजली उपकरण बंद रहने के बावजूद मीटर की रीडिंग तेजी से बढ़ती दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि महिला वर्ग की ओर से यह बात भी सामने आई है कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि का एक हिस्सा बिजली बिल चुकाने में खर्च हो रहा है। डॉ. ध्रुव ने सरकार से उपभोक्ताओं की शिकायतों की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है।
बिना सहमति मीटर बदलने का आरोप
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग या संबंधित एजेंसी की ओर से कई जगह पुराने मीटरों को बिना पूर्व सूचना या उपभोक्ताओं की सहमति के बदलकर स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस व्यवस्था में पारदर्शिता लानी चाहिए और उपभोक्ताओं को विकल्प दिया जाना चाहिए।
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डॉ. ध्रुव ने कहा कि स्मार्ट मीटर की व्यवस्था (Smart Meter Sihawa) को लेकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों और बिल में कथित बढ़ोतरी के कारणों की जांच कराने की मांग की है।
बिजली बिल को लेकर सरकार पर हमला
डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार की बिजली बिल आधा योजना का उल्लेख करते हुए मौजूदा सरकार पर राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले मजदूर, किसान और मध्यम वर्ग को बिजली बिल में राहत मिलती थी, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में लोगों पर बिजली बिल का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर आम उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए। उनके अनुसार स्मार्ट मीटर के बढ़ते विरोध (Smart Meter Sihawa) को देखते हुए सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए।
सोलर पैनल योजना पर भी सवाल
डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने केंद्र और राज्य सरकार की ओर से सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की योजनाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि लोगों को सोलर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, लेकिन यदि उपभोक्ता ऋण लेकर सोलर व्यवस्था लगाता है तो भविष्य में बैटरी बदलने का अतिरिक्त खर्च भी सामने आ सकता है।
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उन्होंने सिहावा विधानसभा क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की स्थिति का मुद्दा भी उठाया। डॉ. ध्रुव का दावा है कि क्षेत्र में दिन और रात कई बार बिजली गुल होने की शिकायतें मिलती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में केवल सोलर पैनल लगाने से ग्रामीण उपभोक्ताओं की बिजली संबंधी सभी समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
अनिवार्यता खत्म करने की मांग
पूर्व विधायक डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने सरकार से मांग की है कि गरीब, किसान और मध्यम वर्ग के परिवारों के हित को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट मीटर को अनिवार्य करने के बजाय वैकल्पिक किया जाए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को अपनी सुविधा के अनुसार व्यवस्था चुनने का अधिकार मिलना चाहिए।
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स्मार्ट मीटर को लेकर मांग (Smart Meter Sihawa) अब राजनीतिक मुद्दा भी बनती दिखाई दे रही है। डॉ. ध्रुव ने सरकार से उपभोक्ताओं की शिकायतों की जांच कराने, बिजली बिल में कथित बढ़ोतरी के कारणों को स्पष्ट करने और स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
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