सीजी भास्कर, 13 सितंबर : हसदेव-अरण्य में तारा कोल ब्लॉक को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम ने स्थिति साफ कर दी है। तारा कोल ब्लॉक की नीलामी (Tara Coal Block) हो चुकी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि खनन शुरू करने की अनुमति मिल गई है। खनन शुरू करने से पहले माइनिंग प्लान, खनन पट्टा, पर्यावरण स्वीकृति, वन स्वीकृति और अन्य सभी जरूरी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी में तारा कोल ब्लॉक के लिए कुल 9 बोलियां प्राप्त हुई थीं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह ब्लॉक सीजी सिन एंड गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड को मिला है। निगम ने स्पष्ट किया है कि सफल बोलीदाता को केवल नीलामी में सफल होने के आधार पर खनन, वन या पर्यावरण से जुड़ी कोई स्वत: मंजूरी नहीं मिलती।
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नीलामी के बाद भी कई मंजूरियां जरूरी
तारा कोल ब्लॉक में वास्तविक खनन शुरू करने से पहले कई स्तरों पर वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसमें माइनिंग प्लान की मंजूरी, खनन पट्टा, पर्यावरणीय प्रभावों का परीक्षण और वन स्वीकृति प्रमुख हैं। इन अनुमतियों के बिना न तो वास्तविक खनन शुरू किया जा सकता है और न ही वृक्षों की कटाई की अनुमति होगी।
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यानी तारा कोल ब्लॉक की मौजूदा स्थिति (Tara Coal Block) को खनन शुरू होने के तौर पर देखना सही नहीं होगा। नीलामी, वन एवं पर्यावरण स्वीकृति और खनन की अनुमति तीन अलग-अलग चरण हैं। हर चरण में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
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2011 में हुआ था पहला आवंटन
तारा कोल ब्लॉक का मामला नया नहीं है। वर्ष 2011 में इसका आवंटन छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को किया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिणामस्वरूप अन्य कोल ब्लॉकों के साथ इसका पूर्व आवंटन भी निरस्त हो गया था।
हसदेव-अरण्य क्षेत्र के दूसरे कोल ब्लॉकों का मामला भी अलग-अलग समय पर सरकारी विद्युत उत्पादन की जरूरतों से जुड़ा रहा है। इनमें परसा ईस्ट और केते बासन प्रमुख ब्लॉकों में शामिल रहा है, जिसे राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की विद्युत उत्पादन जरूरतों के लिए आवंटित किया गया था। तारा ब्लॉक का पुराना आवंटन (Tara Coal Block) और मौजूदा प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी दो अलग प्रक्रियाएं हैं।
वन मंजूरी के बिना खनन नहीं
निगम के अनुसार तारा समेत हसदेव-अरण्य क्षेत्र के कोल ब्लॉकों से जुड़ी वन और पर्यावरण स्वीकृति की प्रक्रिया पहले भी अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ती रही है। वर्ष 2011 में वन सलाहकार समिति की प्रतिकूल अनुशंसा के बावजूद केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के स्तर पर तारा और परसा ईस्ट-केते बासन से जुड़ी वन स्वीकृति के संबंध में निर्णय लिया गया था।
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परसा ईस्ट-केते बासन को जुलाई 2011 में प्रथम चरण और मार्च 2012 में दूसरे चरण की वन स्वीकृति मिली थी। इसी अवधि में परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति से जुड़ी प्रक्रिया भी आगे बढ़ी। हालांकि वर्तमान तारा ब्लॉक की स्थिति में वन और पर्यावरण स्वीकृति की प्रक्रिया (Tara Coal Block) पूरी होना अभी जरूरी है।
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मोरगा ब्लॉक का मुद्दा भी जारी
हसदेव-अरण्य में कोयला संसाधनों के इस्तेमाल का मामला केवल तारा तक सीमित नहीं है। मोरगा कोल ब्लॉक के आवंटन का विषय भी अभी सामने है। पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने मोरगा कोल ब्लॉक को छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के पक्ष में आवंटित करने के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय से अनुरोध किया था।
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राज्य सरकार के पत्र में मोरगा से लगे मदनपुर कोल ब्लॉक के मदनपुर साउथ ब्लॉक का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि इसका आवंटन आंध्र प्रदेश मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को किया जा चुका है। इसी आधार पर मोरगा कोल ब्लॉक छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को आवंटित करने का अनुरोध किया गया था। पत्र में यह भी कहा गया था कि आवंटन के बाद जरूरी पर्यावरणीय अनुमतियों के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध किया जाएगा।
वैज्ञानिक अध्ययन में संरक्षण पर जोर
हसदेव-अरण्य क्षेत्र में भविष्य की खनन गतिविधियों को लेकर भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद ने वैज्ञानिक अध्ययन किया है। इसमें जैव विविधता, वन्यजीव, जलग्रहण क्षेत्र और पर्यावरणीय संवेदनशीलता का आकलन किया गया। अध्ययन में तारा सहित कुछ अन्य कोल ब्लॉकों को कड़े पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और संरक्षण प्रावधानों के अधीन खनन के लिए विचार योग्य माना गया।
राज्य सरकार ने वन संरक्षण और वृक्षारोपण को प्राथमिकता बताते हुए वन सर्वेक्षण रिपोर्ट के आंकड़ों का भी उल्लेख किया है। वर्ष 2021 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्राच्छादन में 683.62 वर्ग किलोमीटर की शुद्ध वृद्धि दर्ज की गई, जो देश के राज्यों में सर्वाधिक बताई गई है। इसी अवधि में राज्य के वनावरण में 702.75 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई थी।
ऊर्जा जरूरत और पर्यावरण में संतुलन
राज्य खनिज विकास निगम ने कहा है कि देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और बिजली आपूर्ति की निरंतरता के लिए घरेलू कोयला संसाधनों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण है। हालांकि किसी भी खनन परियोजना में पर्यावरण और वन स्वीकृति, वैज्ञानिक अध्ययन, प्रतिपूरक वनीकरण और अन्य निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन जरूरी होगा।
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फिलहाल तारा कोल ब्लॉक की वास्तविक स्थिति (Tara Coal Block) यही है कि इसकी प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी पूरी हुई है, लेकिन खनन शुरू नहीं हुआ है। सफल बोलीदाता को सभी जरूरी वैधानिक अनुमतियां हासिल करनी होंगी। इसके बाद ही खनन गतिविधियों की अनुमति मिल सकेगी। सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा और विकास की जरूरतों के साथ वन, पर्यावरण और स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की बात कही है।
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