सीजी भास्कर, 31 जुलाई। गरियाबंद में Teacher Recruitment Scam एक बार फिर सुर्खियों में है। वर्ष 2005 से 2007 के बीच मैनपुर विकासखंड में हुई शिक्षक भर्ती में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने के मामले की दोबारा समीक्षा शुरू हो गई है। कलेक्टर बीएस उइके ने संबंधित विभाग से अद्यतन सूची मांगते हुए दो दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की पहले भी जांच हो चुकी है और कई शिक्षकों पर कार्रवाई की गई थी। अब प्रशासन यह जानना चाहता है कि किन मामलों में कार्रवाई पूरी हो चुकी है और कौन से प्रकरण अभी भी लंबित हैं।

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जांच रिपोर्ट में सामने आए कई नाम
जांच के दौरान शिक्षक भर्ती के 454 पदों में बड़े स्तर पर अनियमितताओं की पुष्टि हुई थी। जांच प्रतिवेदन के आधार पर अब तक 102 शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है।
वहीं उपलब्ध रिपोर्ट में अब भी 111 शिक्षकों के नाम दर्ज हैं, जिन पर फर्जी प्रमाणपत्र, संदिग्ध अनुभव प्रमाणपत्र, गलत दस्तावेज या अन्य अनियमितताओं के आधार पर नियुक्ति पाने के आरोप हैं।
भर्ती प्रक्रिया में मिली कई गंभीर गड़बड़ियां Teacher Recruitment Scam
जांच में कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें कम अंक होने के बावजूद चयन किया गया। इसके अलावा फर्जी डिग्री, अपूर्ण दस्तावेज और निर्धारित आयु से कम उम्र में नियुक्ति जैसी गंभीर विसंगतियां भी दर्ज की गईं।
रिपोर्ट के अनुसार मैनपुर और फिंगेश्वर विकासखंड के कई शिक्षकों के खिलाफ संदिग्ध डीएड, योग्यता प्रमाणपत्र, अनुभव प्रमाणपत्र और विकलांगता प्रमाणपत्र की सत्यता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
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कुछ मामलों में दोबारा होगी दस्तावेजों की जांच
जांच एजेंसियों ने कुछ मामलों में प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच की आवश्यकता भी बताई है। कई अभ्यर्थियों के आवश्यक दस्तावेज अधूरे पाए गए, जबकि कुछ मामलों में दस्तावेजों की सत्यता की पुष्टि नहीं हो सकी।
इन्हीं कारणों से प्रशासन ने पूरे मामले की नई समीक्षा शुरू करने का फैसला लिया है।
कलेक्टर ने मांगी दो दिन में रिपोर्ट
कलेक्टर बीएस उइके के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग से दो दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि पूर्व जांच के बाद किन मामलों में कार्रवाई हुई और कितने प्रकरण अभी भी लंबित हैं।
रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासन आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई पर अंतिम निर्णय लेगा।
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