सीजी भास्कर, 20 जुलाई। भारत के अंतरिक्ष इतिहास में लिखे गए एक नए स्वर्णिम अध्याय का सीधा नाता छत्तीसगढ़ के स्टील सिटी भिलाई (Vikram 1) से जुड़ गया है। देश के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग और इसके ‘मिशन आगमन’ को मुकाम तक पहुँचाने में भिलाई के सुपेला निवासी युवा साइंटिस्ट और फ्लाइट मैकेनिक्स इंजीनियर अजिंक्य मास्के ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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अजिंक्य की इस वैश्विक स्तर की सफलता ने न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि भिलाई सहित पूरे छत्तीसगढ़ और देश के युवाओं को गौरवान्वित किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद भिलाई में उनके निवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

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बायोलॉजी शिक्षक के बेटे ने रचा रॉकेट साइंस में इतिहास Vikram 1
अजिंक्य मास्के की यह सफलता इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि वे एक बेहद साधारण और शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से आते हैं। भिलाई के सुपेला स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से सेवानिवृत्त जीवविज्ञान व्याख्याता मोरेश्वर सोनी के वे सुपुत्र हैं। पिता ने लंबे समय तक भिलाई के बच्चों को विज्ञान की शिक्षा दी और आज उनके बेटे ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अपनी अनूठी प्रतिभा का लोहा मनवाकर उस शैक्षणिक परंपरा को एक नई और असाधारण ऊँचाई पर पहुँचा दिया है।
क्या थी अजिंक्य की भूमिका? तय किया रॉकेट का रास्ता
अजिंक्य मास्के वर्तमान में देश की अग्रणी स्पेस-टेक कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस में फ्लाइट मेकेनिक्स इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। वे कंपनी की सबसे महत्वपूर्ण मिशन एंड जीएनसी (गाइडेंस, नेविगेशन एंड कंट्रोल) टीम का हिस्सा हैं।
विक्रम-1 के इस प्रथम कक्षीय मिशन में अजिंक्य की मुख्य जिम्मेदारी मिशन डिजाइन एंड एनालिसिस की थी। इसके तहत प्रक्षेपण यान (रॉकेट) की पूरी उड़ान योजना तैयार करना, उसका प्रक्षेपक वक्र यानि रॉकेट अंतरिक्ष में किस रास्ते से आगे बढ़ेगा और मिशन के प्रदर्शन का सटीक अध्ययन शामिल था। उनकी इसी तकनीकी दक्षता और सटीक कैलकुलेशन के दम पर रॉकेट ने सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश किया।

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आईआईएसटी तिरुवनंतपुरम से की है पढ़ाई Vikram 1
अजिंक्य की शुरुआती पढ़ाई भिलाई में होने के बाद उन्होंने भारत के प्रतिष्ठित अंतरिक्ष संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी तिरुवनंतपुरम से एरोस्पेस इंजीनियरिंग में एम.टेक की उपाधि प्राप्त की। अपनी इसी विशेषज्ञता और कड़ी मेहनत के बल पर वे देश के सबसे महत्वाकांक्षी निजी स्पेस मिशन की कोर इंजीनियरिंग टीम में जगह बनाने में सफल रहे।
पूरे शहर में जश्न, युवाओं के लिए बने रोल मॉडल
अजिंक्य की इस ऐतिहासिक सफलता पर भिलाई-दुर्ग के शिक्षकों, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों और शहरवासियों ने उनके पिता मोरेश्वर सोनी और पूरे परिवार को मिलकर बधाई व शुभकामनाएँ (Vikram 1) दी हैं।
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भिलाई के अजिंक्य मास्के की यह सफलता छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है कि यदि आपके पास दृढ़ संकल्प, उत्कृष्ट शिक्षा और निरंतर परिश्रम करने का जज्बा हो, तो संसाधनों की कमी कभी आड़े नहीं आती और आप वैश्विक या अंतरिक्ष के स्तर पर भी भारत का झंडा गाड़ सकते हैं।
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