सीजी भास्कर, 05 अक्टूबर। गणेश उत्सव के बाद रायपुर में विसर्जन कुंड का पानी उतरते ही मूर्तियों को लेकर की गई तैयारियों की तस्वीर सामने (POP Idols) आई है। खारुन नदी किनारे बनाए गए विशाल विसर्जन कुंड में पानी कम होने के बाद मिट्टी की मूर्तियां घुली हुई मिलीं, जबकि पीओपी से बनी कई मूर्तियां अपने पुराने आकार में पड़ी दिखाई दीं।
मूर्तियों की यह स्थिति सार्वजनिक विसर्जन स्थलों पर पीओपी के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े कर रही है। खासकर तब, जब शहर में मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं को बढ़ावा देने और पीओपी मूर्तियों पर रोक को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाते रहे हैं।

मिट्टी की मूर्तियां घुलीं, पीओपी रही जस की तस POP Idols
विसर्जन कुंड में पानी कम होने के बाद मूर्तियों की स्थिति में साफ अंतर नजर आया। मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाएं पानी में घुल चुकी थीं, जबकि पीओपी की मूर्तियां काफी हद तक उसी अवस्था में दिखाई दीं।
इससे उन दावों पर सवाल उठ रहे हैं, जिनमें शहर में मिट्टी की मूर्तियों को ही बढ़ावा देने की बात कही जाती रही है। सार्वजनिक विसर्जन स्थलों पर पीओपी की मूर्तियां पहुंचने से प्रशासन की निगरानी पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
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घर पर विसर्जन को लेकर बढ़ी जागरूकता
रायपुर शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इस बार घर पर गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर भी लोगों में जागरूकता देखने (POP Idols) को मिली। कई परिवारों ने मिट्टी की मूर्तियां स्थापित कीं और बाद में घर पर ही उनका विसर्जन किया।
इसके बावजूद विसर्जन कुंड में पीओपी की मूर्तियां मिलने से पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों और सार्वजनिक विसर्जन स्थलों की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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पीओपी पर निगरानी की जरूरत
पीओपी की मूर्तियां पानी में आसानी से नहीं घुलतीं, जिससे विसर्जन के बाद इनके निपटारे की समस्या बनी (POP Idols) रहती है। ऐसे में सार्वजनिक विसर्जन स्थलों पर पहुंचने वाली मूर्तियों की निगरानी और नियमों के पालन को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी अहम हो जाती है।
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