सीजी भास्कर, 22 सितंबर : बलौदाबाजार में छात्रावास में बिना पंजीयन छात्र को रखने और उसके बाद उसके लापता होने के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। छात्रावास अधीक्षक पर कार्रवाई (Hostel Superintendent Suspended) करते हुए अर्जुनी स्थित प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास के प्रभारी अधीक्षक लवकेश निराला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
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बिना पंजीयन छात्र को छात्रावास में रखा
मामला शासकीय प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास अर्जुनी का है। जांच में सामने आया कि देवव्रत ध्रुव छात्रावास का पंजीकृत छात्र नहीं था। इसके बावजूद उसे छात्रावास में बिना पंजीयन के रखा गया था। अधीक्षक ने अपने जवाब में बताया कि छात्र की परिस्थितियों को देखते हुए मानवीय आधार पर उसे छात्रावास में रखा गया था। हालांकि, बिना पंजीयन छात्र को रखना (Hostel Superintendent Suspended) और उसकी अभिरक्षा से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया जाना प्रशासन ने गंभीर माना।
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आवेदन देकर छात्रावास से चला गया छात्र
लिमाही निवासी कुलेश्वर प्रसाद ध्रुव ने सहायक आयुक्त आदिवासी विकास के समक्ष शिकायत की थी कि छात्रावास में रहने वाला 15 वर्षीय देवव्रत ध्रुव 29 जुलाई 2026 को अवकाश का आवेदन देकर छात्रावास से चला गया था। इसके बाद वह न तो घर लौटा और न ही छात्रावास वापस आया। शिकायत मिलने के बाद सहायक आयुक्त आदिवासी विकास ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की। समिति की जांच में छात्र के छात्रावास से जाने संबंधी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। छात्र के लापता होने की घटना (Hostel Superintendent Suspended) को लेकर भी कई सवाल उठे।
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मां ने छात्र को जाने की अनुमति नहीं दी थी
जांच समिति के प्रतिवेदन के अनुसार छात्रावास अधीक्षक और स्टाफ ने छात्र के जाने से पहले उसकी मां से फोन पर बात कराई थी। हालांकि, छात्र की मां ने छात्रावास छोड़ने की अनुमति नहीं देने की बात कही। जांच के बाद सहायक आयुक्त ने प्रभारी अधीक्षक लवकेश निराला को कारण बताओ नोटिस जारी किया। उनके जवाब में छात्र के पंजीकृत नहीं होने और मानवीय आधार पर छात्रावास में रखे जाने की जानकारी दी गई। अधीक्षक का जवाब असंतोषजनक (Hostel Superintendent Suspended) पाए जाने के बाद कार्रवाई की गई।
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कर्तव्य में घोर लापरवाही मानी गई
प्रशासन ने बिना पंजीयन छात्र को छात्रावास में रखने और पालक की सहमति के बिना उसकी अभिरक्षा से छात्र के चले जाने की घटना को अधीक्षक की कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही माना। जिला प्रशासन के अनुसार, अधीक्षक का यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के प्रावधानों के विपरीत पाया गया। इसके बाद छात्रावास अधीक्षक का निलंबन (Hostel Superintendent Suspended) छत्तीसगढ़ सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियम 1966 के नियम 3 के तहत किया गया।
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निलंबन के साथ विभागीय जांच भी शुरू
लवकेश निराला को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच भी संस्थित की गई है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, कसडोल निर्धारित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद छात्रावासों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, पंजीयन और अभिरक्षा से जुड़े नियमों के पालन को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। प्रशासन की बड़ी कार्रवाई (Hostel Superintendent Suspended) के बाद अब विभागीय जांच के निष्कर्ष का इंतजार है।



