सीजी भास्कर, 4 अक्टूबर : कहीं तेंदुआ रिहायशी इलाके में बने मठ पर आराम करता नजर आया तो कहीं शहद के छत्ते के लिए मादा भालू पानी की टंकी पर चढ़ गई। दोनों घटनाओं के वीडियो सामने आने के बाद लोगों में दहशत बढ़ गई है। वन्यजीवों की रिहायशी इलाकों में दस्तक (Kanker Leopard Bear) ने एक बार फिर इंसानी बस्तियों और जंगल के बीच बढ़ते संघर्ष की तस्वीर सामने ला दी है।
एक घटना में तेंदुआ बस्ती के बीच नजर आया, जबकि दूसरी घटना में मादा भालू अपने दो शावकों के साथ गांव पहुंची। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीमों ने दोनों जगह मोर्चा संभाला। तेंदुए और भालू की मौजूदगी (Kanker Leopard Bear) के बाद लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
मामला उत्तर बस्तर कांकेर जिले का है। शनिवार को कांकेर शहर की न्यू आरईएस रामनगर कॉलोनी में एक मठ पर तेंदुआ दिखाई दिया। वहीं शहर से लगे ग्राम सातलोर में मादा भालू अपने दो शावकों के साथ पहुंची और पानी की टंकी पर चढ़कर शहद का छत्ता तोड़कर शहद खाने लगी। कांकेर में वन्यजीवों की हलचल (Kanker Leopard Bear) के बाद वन विभाग की टीमें सक्रिय हो गईं।
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मठ पर बैठा तेंदुआ
शनिवार शाम आरईएस रामनगर कॉलोनी स्थित एक मठ में स्थानीय लोगों ने तेंदुए को बैठे देखा। लोगों ने उसका वीडियो बनाया और तत्काल वन विभाग को सूचना दी। रिहायशी इलाके में तेंदुआ दिखने के बाद आसपास के लोगों में डर फैल गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखी। रिहायशी इलाके में तेंदुए की दस्तक (Kanker Leopard Bear) के बाद लोगों से सावधानी बरतने को कहा गया।
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शहद के लिए टंकी पर भालू
दूसरी घटना शहर से लगे ग्राम सातलोर की है। देर रात मादा भालू अपने दो शावकों के साथ बस्ती में पहुंच गई। इसी दौरान उसकी नजर पानी की टंकी पर लगे शहद के छत्ते पर पड़ी। मादा भालू पानी की टंकी पर चढ़ गई और छत्ता तोड़कर शहद खाने लगी। ग्रामीणों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाया और वन विभाग को इसकी जानकारी दी। शहद के लिए टंकी पर चढ़ा भालू (Kanker Leopard Bear) अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
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रातभर गश्त, सुबह खदेड़ा
सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम सातलोर पहुंची। टीम ने रातभर इलाके में गश्त की। सुबह भालू को बस्ती से बाहर जंगल की ओर खदेड़ा गया। ग्रामीणों के मुताबिक सातलोर में भालू के आबादी क्षेत्र में पहुंचने की यह पहली घटना नहीं है। आए दिन भालू के गांव में आने से लोगों में डर बना रहता है। खासकर रात में ग्रामीण घर से बाहर निकलने से बचते हैं। भालू के बार-बार बस्ती में आने (Kanker Leopard Bear) से ग्रामीणों ने वन विभाग से निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
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वन विभाग की अपील
वन परिक्षेत्र अधिकारी के मुताबिक दोनों स्थानों पर तेंदुए और भालू के पहुंचने की सूचना मिली थी। जानकारी मिलते ही टीमों को मौके पर भेजा गया। विभाग ने लोगों से जंगली जानवरों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं करने की अपील की है। वन्यजीव दिखाई देने पर भीड़ लगाने या वीडियो बनाने के बजाय तत्काल वन विभाग को सूचना देने की सलाह दी गई है। वन्यजीवों से दूरी बनाए रखने की अपील (Kanker Leopard Bear) के साथ विभाग ने लोगों को सतर्क रहने कहा है।
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कांकेर में पहले भी दिखे तेंदुए
कांकेर और आसपास के इलाकों में इससे पहले भी तेंदुए के रिहायशी क्षेत्रों के करीब पहुंचने की घटनाएं सामने आती रही हैं। 6 अगस्त को सरोना वन परिक्षेत्र में शिकार का पीछा करते हुए एक तेंदुआ कुएं में गिर गया था, जिसे वन विभाग ने रेस्क्यू किया था। 15 जून को धमतरी के गंगरेल-कुकरेल मार्ग पर भी तेंदुआ सड़क पर बैठा नजर आया था। इसके अलावा जुलाई और अगस्त में धमतरी, गरियाबंद, बीजापुर और बिलासपुर रेल मंडल क्षेत्र में भी तेंदुए की मौजूदगी सामने आई थी।
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भालू के हमलों का सिलसिला
छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में भालू के आबादी क्षेत्र में पहुंचने और हमले की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। 5 अगस्त को कांकेर के नरहरपुर क्षेत्र में मादा भालू के हमले में दो लोगों की मौत और एक ग्रामीण के घायल होने की घटना सामने आई थी। इसके अलावा अगस्त में कांकेर और भरतपुर में भालू के हमले की घटनाएं सामने आईं। जुलाई में सूरजपुर में भी महिला पर भालू के हमले की खबर आई थी। इन घटनाओं के बीच सातलोर में मादा भालू का शावकों के साथ पहुंचना वन विभाग के लिए भी सतर्कता का विषय है।
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इंसान और वन्यजीवों की बढ़ती दूरी
कांकेर में लगातार रिहायशी इलाकों के आसपास वन्यजीवों की मौजूदगी से मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती सामने आ रही है। भोजन और पानी की तलाश में वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं। ताजा घटनाओं में वन विभाग ने दोनों जगहों पर पहुंचकर स्थिति संभाली है। अब लोगों की सुरक्षा के साथ वन्यजीवों की निगरानी और सुरक्षित रेस्क्यू पर भी विभाग की नजर रहेगी।
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