सीजी भास्कर, 2 अक्टूबर : महानदी (Mahanadi Water Dispute) को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच दशकों से चला आ रहा विवाद अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। नदी के पानी के बंटवारे, बांधों के निर्माण और जल प्रबंधन को लेकर दोनों राज्यों के अपने-अपने दावे हैं। हाल की बाढ़ ने एक बार फिर इस पुराने विवाद और जल प्रबंधन पर बहस तेज कर दी है।
1983 से जारी है विवाद
महानदी जल विवाद की जड़ें 1983 से जुड़ी हैं। समय के साथ दोनों राज्यों के बीच नदी के पानी के इस्तेमाल को लेकर मतभेद बढ़ते गए। ओडिशा लगातार छत्तीसगढ़ में बने बांधों और जल परियोजनाओं पर सवाल उठाता रहा है, जबकि छत्तीसगढ़ अपने हिस्से के पानी के इस्तेमाल को उचित बताता रहा है।
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महानदी का कितना बड़ा है जलक्षेत्र
महानदी की कुल लंबाई करीब 851 किलोमीटर है और इसका जलग्रहण क्षेत्र 1,41,589 वर्ग किलोमीटर है। इसका बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ और ओडिशा में फैला है। महानदी की प्रमुख सहायक नदियों में छत्तीसगढ़ की शिवनाथ, हसदेव, मांड और ईब तथा ओडिशा की ओंग, तेल और जोंक शामिल हैं।
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धमतरी से निकलकर बंगाल की खाड़ी तक
महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सिहावा क्षेत्र से माना जाता है। इसके बाद नदी छत्तीसगढ़ और ओडिशा से होकर करीब 851 किलोमीटर का सफर तय करती हुई बंगाल की खाड़ी में मिलती है। नदी का असर दोनों राज्यों की खेती, उद्योग और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
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ओडिशा का क्या है दावा
ओडिशा का आरोप रहा है कि छत्तीसगढ़ में महानदी और उसकी सहायक नदियों पर कई बांध और जल परियोजनाएं बनने से नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर असर पड़ा है। उसका कहना है कि खासकर गैर-मानसून अवधि में हीराकुंड बांध में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचता, जिससे सिंचाई और अन्य जरूरतों पर असर पड़ता है।
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छत्तीसगढ़ का अपना तर्क
छत्तीसगढ़ का कहना है कि हीराकुंड बांध के लिए निर्धारित मात्रा से अधिक पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। राज्य का तर्क है कि महानदी और उसकी सहायक नदियों के जल संसाधनों का इस्तेमाल प्रदेश की जरूरतों के अनुसार किया जाना जरूरी है।
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बाढ़ के बीच फिर उठा जल प्रबंधन का सवाल
हाल में लगातार बारिश के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में बाढ़ के हालात बने। बड़ी संख्या में गांव और लोग प्रभावित हुए। ऐसे में महानदी में पानी के प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण को लेकर भी सवाल उठे। हालांकि बाढ़ की किसी एक वजह को केवल अंतरराज्यीय जल विवाद से जोड़ना उचित नहीं होगा। बारिश, जलाशयों का संचालन, नदी का प्रवाह और स्थानीय जल निकासी जैसे कई कारक बाढ़ की स्थिति को प्रभावित करते हैं।
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अब सरकार समाधान की बात कर रही
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार होने से संवाद और समन्वय के जरिए इस पुराने विवाद का सकारात्मक समाधान निकाला जा सकता है। राज्य सरकार का कहना है कि छत्तीसगढ़ के हितों की रक्षा के साथ ओडिशा के साथ सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान की दिशा में प्रयास जारी हैं।
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CWC के फैसले पर दोनों राज्यों की सहमति
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों ने केंद्रीय जल आयोग (CWC) को लिखित रूप से आश्वस्त किया है कि दोनों राज्यों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए आयोग की ओर से लिया गया निर्णय दोनों सरकारों को मान्य होगा। अब नजर इस बात पर है कि दशकों पुराने विवाद का स्थायी समाधान कब निकलता है।
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