सीजी भास्कर, 27 अगस्त। मैनपाट के बरीमा में बॉक्साइट खनन को लेकर ग्रामीणों और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (CMDC) के बीच विवाद बढ़ गया है। ग्रामीण 1 जुलाई से बॉक्साइट उत्खनन और परिवहन रोककर मुआवजे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उचित मुआवजा मिले बिना वे अपनी जमीन से खनन नहीं होने देंगे। (Mainpat Bauxite Mining Protest)
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जमीन को दोबारा खेती योग्य बनाने की मांग : Mainpat Bauxite Mining Protest
ग्रामीणों के मुताबिक, बरीमा में बॉक्साइट खनन के लिए CMDC को 2017 से 2024 तक लीज मिली थी। उनका दावा है कि लीज अवधि खत्म होने के बाद इसे बढ़ाने के लिए ग्रामीणों की सहमति या पंचायत का प्रस्ताव नहीं लिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद उनकी जमीन से बॉक्साइट निकाला जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि CMDC की ओर से 72,500 रुपए सालाना मुआवजा तय किया गया है, जबकि वे 10 लाख रुपए प्रति एकड़ की मांग कर रहे हैं। साथ ही खनन से खोदी गई जमीन को समतल कर दोबारा खेती योग्य बनाने की मांग की जा रही है।
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CMDC ने ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज कराई FIR
बॉक्साइट परिवहन रोकने को लेकर CMDC के उप महाप्रबंधक दीपक कुमार गुप्ता ने कमलेश्वरपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने धारा 126 और 221 के तहत मामला दर्ज किया है। CMDC का आरोप है कि ग्रामीण समझाइश के बावजूद बॉक्साइट परिवहन रोक रहे हैं।
वहीं, ग्रामीणों ने भी CMDC और ठेकेदार के खिलाफ थाने में शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी शिकायत पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई है।
फिलहाल खनन और मुआवजे को लेकर दोनों पक्षों में विवाद जारी है। वहीं, मैनपाट में अन्य बॉक्साइट खदानों को लेकर भी ग्रामीणों का विरोध सामने आता रहा है।
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