सीजी भास्कर, 9 सितंबर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती में महिला आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षित पदों पर पुरुष उम्मीदवारों की नियुक्ति (Women Teacher Quota) बिना किसी वैधानिक प्रावधान के नहीं की जा सकती। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी को गंभीर माना और प्रभावित अभ्यर्थी को मुआवजा देने का निर्देश दिया।
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2013-14 की भर्ती का मामला
मामला रायपुर नगर निगम की वर्ष 2013-14 की सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़ा है। उस दौरान नगर निगम में कुल 204 पदों पर भर्ती की गई थी। धमतरी निवासी नम्रता देवांगन ने याचिका दायर कर बताया कि ओबीसी महिला वर्ग में 60.70 अंक हासिल करने के बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं मिली, जबकि ओबीसी महिला आरक्षित पदों (Women Teacher Quota) में पुरुष उम्मीदवारों को नियुक्त कर दिया गया।
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नगर निगम की ओर से दलील दी गई कि महिला वर्ग में पात्र अभ्यर्थी न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर सकीं। इसलिए खाली रह गए पदों को उसी वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों से भर दिया गया। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि महिला आरक्षण के पद (Women Teacher Quota) बिना वैधानिक आधार के पुरुष उम्मीदवारों से नहीं भरे जा सकते।
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12 पुरुष शिक्षकों की नियुक्ति पर सवाल
जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की सिंगल बेंच ने भर्ती प्रक्रिया को नियम विरुद्ध माना। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी पद को विशेष रूप से महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है तो उसे पुरुष उम्मीदवार से भरने के लिए स्पष्ट वैधानिक प्रावधान होना जरूरी है। इस आधार पर अदालत ने पुरुष उम्मीदवारों की नियुक्ति (Women Teacher Quota) को गैरकानूनी ठहराया।
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हालांकि, कोर्ट ने करीब 12 साल पहले नियुक्त किए गए 12 पुरुष शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने का आदेश नहीं दिया। यानी लंबे समय से नौकरी कर रहे इन शिक्षकों को तत्काल सेवा से हटाने की कार्रवाई नहीं होगी।
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याचिकाकर्ता को 3 लाख मुआवजा
भर्ती प्रक्रिया में हुई लापरवाही से नम्रता देवांगन को हुए मानसिक और आर्थिक नुकसान को देखते हुए हाईकोर्ट ने मुआवजे का आदेश दिया है। अदालत ने मुआवजा भुगतान (Women Teacher Quota) के तहत रायपुर नगर निगम कमिश्नर को नम्रता देवांगन को 3 लाख रुपये देने का निर्देश दिया है।
यह फैसला महिला आरक्षण से जुड़े पदों को भरने की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाई कोर्ट ने साफ किया कि आरक्षित वर्ग के पदों को दूसरे वर्ग के उम्मीदवारों से भरने के लिए संबंधित नियम और वैधानिक प्रावधानों का पालन जरूरी है।
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