सीजी भास्कर, 03 अगस्त। बस्तर संभाग की मधुर गुड़ योजना के लिए इस वर्ष नागरिक आपूर्ति निगम (नान) करीब 18 हजार टन गुड़ खरीदेगा। हालांकि, बाजार में गुड़ की कीमत लगभग 50 रुपए प्रति किलो होने के बावजूद नान 65 रुपए प्रति किलो की दर से खरीद की तैयारी कर रहा है। टैक्स जोड़ने पर यह कीमत करीब 69 रुपए प्रति किलो तक पहुंच जाएगी। इससे सरकार पर अनुमानित 30 से 35 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है। (Chhattisgarh Tender Dispute)
पिछले वर्ष नान ने 54.41 रुपए प्रति किलो की दर से 21 हजार टन गुड़ खरीदा था। योजना के तहत बस्तर संभाग में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से हितग्राहियों को गुड़ वितरित किया जाता है। इस बार भी टेंडर प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
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टेंडर की शर्तों पर उठे सवाल : Chhattisgarh Tender Dispute
जानकारों के अनुसार, निविदा की शर्तें ऐसी रखी गई हैं कि सीमित संख्या में ही कंपनियां इसमें भाग ले सकें। सप्लायर के लिए पिछले छह वित्तीय वर्षों में किसी एक वर्ष में कम से कम तीन हजार टन गुड़ की सरकारी आपूर्ति का अनुभव और पिछले तीन वर्षों में किसी एक वर्ष का न्यूनतम 40 करोड़ रुपए का टर्नओवर अनिवार्य किया गया है।
इन शर्तों के चलते वर्षों से कुछ चुनिंदा कंपनियां ही टेंडर प्रक्रिया में शामिल हो रही हैं। वर्ष 2026-27 के लिए जारी निविदा में भी पहली बार केवल दो फर्मों ने आवेदन किया। तीन योग्य फर्मों ने एक ही दिन महज सात मिनट के भीतर ऑनलाइन टेंडर जमा किए, जिनमें से दो फर्मों ने एक ही ओईएम कंपनी के उत्पाद का उल्लेख किया है।
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स्टार्टअप को राहत नहीं, जांच की बात
विशेषज्ञों का कहना है कि अनुभव और टर्नओवर की सख्त शर्तों के कारण प्रदेश के अधिकांश स्टार्टअप और सूक्ष्म एवं लघु उद्योग (एमएसएमई) इस प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं। जबकि सरकार इन क्षेत्रों को बढ़ावा देने की बात करती रही है।
खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने कहा है कि खुली निविदा में ऐसी शर्तें नहीं रखी जा सकतीं, जिनसे प्रतिस्पर्धा सीमित हो। उन्होंने मामले की जांच कराने और आवश्यकता पड़ने पर टेंडर निरस्त करने तक की बात कही है।
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