सीजी भास्कर, 13 अगस्त : झीरम घाटी नरसंहार मामले में 11 साल बाद न्यायिक प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। जगदलपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने लगातार तीन दिनों तक चली मैराथन बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत अब 31 अगस्त 2026 को बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाएगी। इस फैसले (Jhiram Ghati Verdict) पर पूरे छत्तीसगढ़ की नजर है।
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तीन दिन चली अंतिम बहस, 31 अगस्त को फैसला
एनआईए के विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत की अदालत में सोमवार से बुधवार तक मामले की अंतिम सुनवाई हुई। इस दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने करीब 12 घंटे तक अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। बुधवार दोपहर करीब 2 बजे दोनों पक्षों की अंतिम प्रत्युत्तर दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
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अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता दिनेश पाणिग्राही ने मामले से जुड़े साक्ष्यों और तथ्यों को अदालत के सामने रखा। इसके बाद बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने करीब चार घंटे तक कानूनी बिंदुओं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपनी दलीलें पेश कीं।
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10 आरोपियों पर चल रहा केस
झीरम घाटी मामले की सुनवाई के दौरान कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। जांच एजेंसी ने मामले में 41 लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें से 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकी थी। गिरफ्तार आरोपियों में से एक की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। वर्तमान में 10 आरोपियों के खिलाफ न्यायिक हिरासत में मुकदमा चल रहा है।
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अब अदालत की अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद (Jhiram Ghati Verdict) का इंतजार है। 31 अगस्त को आने वाले फैसले से इस लंबे समय से चले आ रहे मामले की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण पड़ाव आएगा।
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25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला
25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में माओवादियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा और उदय मुदलियार समेत 29 नेताओं, कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई थी।
झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक हिंसक घटनाओं में शामिल है। घटना के बाद मामले की जांच एनआईए को सौंपी गई थी। एनआईए ने वर्ष 2014 में पहली चार्जशीट और वर्ष 2015 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी।
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जांच और न्यायिक प्रक्रिया का लंबा सफर
केंद्र सरकार के निर्देश पर 27 मई 2013 को एनआईए ने जांच अपने हाथ में ली थी। इसके बाद राज्य सरकार ने भी न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था। वर्ष 2020 में राज्य सरकार ने मामले में अलग से एसआईटी गठित की और दरभा थाने में बड़ी साजिश की जांच के लिए नई एफआईआर दर्ज की गई।
न्यायिक आयोग ने नवंबर 2021 में अपनी जांच रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी थी। वहीं नवंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पुलिस की एफआईआर की जांच के खिलाफ एनआईए की याचिका खारिज कर दी थी। अब 31 अगस्त 2026 को एनआईए की विशेष अदालत के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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