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DEO Charge : DEO प्रभार पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सीनियर अधिकारी की याचिका खारिज, जूनियर को प्रभार देने का रास्ता साफ

By Newsdesk Admin
14/08/2026
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DEO Charge
DEO Charge

सीजी भास्कर, 14 अगस्त। जिला शिक्षा अधिकारी यानी DEO और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी BEO के प्रभार को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम फैसला (DEO Charge) सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया कि केवल सीनियरिटी के आधार पर कोई अधिकारी उच्च पद का प्रभार पाने का कानूनी अधिकार नहीं जता सकता। जूनियर अधिकारी को प्रभारी DEO या BEO बनाना प्रशासनिक निर्णय का हिस्सा है और ऐसे मामलों में कोर्ट आमतौर पर हस्तक्षेप नहीं करेगा।

Contents
  • जूनियर अधिकारी को DEO बनाने पर विवाद DEO Charge
  • हाईकोर्ट ने सीनियरिटी के दावे पर क्या कहा?
  • कार्यशैली और योग्यता पर भी विचार कर सकता है शासन
  • बिलासपुर समेत दूसरे जिलों में भी असर

गरियाबंद में जूनियर अधिकारी को प्रभारी DEO बनाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस बीडी गुरु की पीठ ने यह टिप्पणी की। कोर्ट ने सीनियर अधिकारी की याचिका खारिज कर दी। फैसले के बाद प्रदेश के दूसरे जिलों में भी ऐसे प्रशासनिक प्रभार से जुड़े मामलों को लेकर स्थिति साफ होने की उम्मीद है।

DEO Charge

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जूनियर अधिकारी को DEO बनाने पर विवाद DEO Charge

स्कूल शिक्षा विभाग ने 10 जून 2026 को आदेश जारी कर प्राचार्य राजेश चंद्राकर को गरियाबंद का प्रभारी DEO नियुक्त किया था। इस आदेश को छुरा ब्लॉक में पदस्थ BEO किशुन लाल मातवाले ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता का कहना था कि वह वर्ष 1995 से शिक्षा विभाग में सेवा दे रहे हैं और राजेश चंद्राकर से वरिष्ठ हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा नियम, 2026 का हवाला देते हुए खुद को DEO पद के प्रभार के लिए पात्र बताया।

याचिका में आरोप लगाया गया कि वरिष्ठता की अनदेखी करते हुए उनसे जूनियर अधिकारी को प्रभारी DEO की जिम्मेदारी दी गई है।

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हाईकोर्ट ने सीनियरिटी के दावे पर क्या कहा?

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी को उच्च पद का प्रभार दिया जाना स्थायी नियुक्ति के समान नहीं है। यह प्रशासनिक जरूरत के तहत की जाने वाली अस्थायी व्यवस्था है।

कोर्ट ने कहा कि जब तक किसी नियम या कानून में यह स्पष्ट रूप से अनिवार्य नहीं किया गया है कि उच्च पद का प्रभार केवल वरिष्ठ अधिकारी को ही दिया जाएगा, तब तक सिर्फ सीनियरिटी के आधार पर प्रभार पाने का अधिकार नहीं बनता।

इसलिए जूनियर अधिकारी को प्रभारी DEO या BEO बनाए जाने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि वरिष्ठ अधिकारी के अधिकार का उल्लंघन हुआ है।

कार्यशैली और योग्यता पर भी विचार कर सकता है शासन

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि किसी अधिकारी को उच्च पद का प्रभार देने से पहले सक्षम प्राधिकारी उसकी कार्यशैली और उपयुक्तता पर विचार कर सकता है।

ऐसे फैसले प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आते हैं। जब तक निर्णय में किसी स्पष्ट नियम का उल्लंघन या दुर्भावना जैसी स्थिति सामने नहीं आती, तब तक अदालत प्रशासनिक फैसले में सामान्य तौर पर हस्तक्षेप नहीं करेगी।

इसी आधार पर कोर्ट ने गरियाबंद में प्रभारी DEO की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।

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बिलासपुर समेत दूसरे जिलों में भी असर

हाईकोर्ट के इस फैसले का असर प्रदेश के दूसरे जिलों में DEO और BEO के प्रभार से जुड़े मामलों पर भी पड़ सकता है। बिलासपुर में भी जूनियर अधिकारी को प्रभारी DEO बनाए जाने के खिलाफ याचिका दायर की गई है।

इस मामले की शुरुआती सुनवाई में हाईकोर्ट ने नियुक्ति आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसके कारण प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हुई थी। अब गरियाबंद मामले में हाईकोर्ट के स्पष्ट रुख के बाद ऐसे मामलों में शासन के प्रशासनिक अधिकार को लेकर स्थिति काफी हद तक साफ हो गई है।

फैसले का मुख्य संदेश यही है कि केवल वरिष्ठ होने के आधार पर कोई अधिकारी उच्च पद का प्रभार पाने का दावा नहीं कर सकता। प्रभार अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है और सक्षम प्राधिकारी संबंधित अधिकारी की उपयुक्तता और कार्यशैली को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले सकता है।

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