सीजी भास्कर, 19 अगस्त : कुत्तों के झुंड से जान बचाकर एक नन्हा माउस डियर (Mouse Deer Rescue ) अचानक आबादी वाले इलाके में पहुंच गया। घबराया हुआ वन्यजीव भागते-भागते कलेक्ट्रेट परिसर में आ गया, जहां लोगों की नजर उस पर पड़ी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और उसे सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। बाद में स्वास्थ्य जांच के बाद उसे प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
यह भी पढ़ें : Disha Committee : दिशा समिति की बैठक में तोखन साहू ने कसी अफसरों पर लगाम, योजनाओं का लाभ समय पर दिलाने के दिए निर्देश
कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचा माउस डियर
घटना दंतेवाड़ा की है। बुधवार को जंगल की घनी झाड़ियों में रहने वाला माउस डियर कुत्तों के पीछा करने से काफी दूर निकल आया और दंतेवाड़ा कलेक्ट्रेट परिसर तक पहुंच गया। यहां मौजूद लोगों ने उसे देखा तो तत्काल वन विभाग को इसकी सूचना दी।
वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सावधानीपूर्वक माउस डियर को अपने कब्जे में लिया। पशु चिकित्सा अधिकारी ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया और जरूरत के मुताबिक उपचार किया गया।
यह भी पढ़ें : School Sports : रिमझिम फुहारों के बीच गूंजा खिलाड़ियों का जोश, 540 खिलाड़ियों के मार्चपास्ट से सजा भव्य खेल समारोह
स्वस्थ होने पर बचेली के जंगल में छोड़ा
रेस्क्यू के बाद माउस डियर को कुछ समय निगरानी में रखा गया। स्वास्थ्य सामान्य पाए जाने के बाद वन विभाग की टीम उसे बचेली वन क्षेत्र में ले गई। यहां उसके लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास का चयन कर उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया।
वन विभाग के अनुसार पूरी कार्रवाई वन मंत्री केदार कश्यप, प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण पांडे और मुख्य वन संरक्षक स्टाइलो मंडावी के मार्गदर्शन में की गई। वनमंडलाधिकारी के निर्देशन में टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए वन्यजीव की जान बचाई।
यह भी पढ़ें : RERA Tribunal : पुराने मामलों पर अब जल्द होगा फैसला, बिल्डरों की मनमानी रोकने रेरा अधिकरण ने तय की नई प्राथमिकता
आबादी में पहुंचना माउस डियर के लिए असामान्य
माउस डियर आमतौर पर घने जंगलों और झाड़ियों के बीच रहना पसंद करता है। यह बेहद शर्मीला वन्यजीव है। खतरा महसूस होने पर यह तेजी से झाड़ियों में छिप जाता है। कुत्तों के लगातार पीछा करने के कारण यह अपने प्राकृतिक आवास से दूर निकल आया और कलेक्ट्रेट परिसर तक पहुंच गया। रेस्क्यू के बाद वन विभाग ने उसके स्वास्थ्य और व्यवहार पर निगरानी रखी।
यह भी पढ़ें : Chhattisgarh Weather : फिर सक्रिय हुआ मानसून, आज भी कई इलाकों में भारी बारिश के आसार
हिरन जैसा दिखता है, लेकिन हिरन नहीं
माउस डियर को भारतीय चीतल शेवरोटेन भी कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम मासकिओला इंडिका है। यह देखने में छोटे हिरन जैसा जरूर लगता है, लेकिन हिरन परिवार का सदस्य नहीं है।
इसका शरीर करीब 50 से 60 सेंटीमीटर लंबा और वजन लगभग तीन किलोग्राम तक होता है। शरीर पर सफेद धब्बे और धारियां इसकी खास पहचान हैं। नर और मादा दोनों में सींग नहीं होते। यह मुख्य रूप से रात और सुबह-शाम सक्रिय रहता है।
यह भी पढ़ें : Jagdalpur Teacher Arrest : नाबालिग छात्रा से दुर्व्यवहार के आरोप में शिक्षक पर POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज
वन्यजीव संरक्षण में विशेष दर्जा
माउस डियर के छिपकर रहने और कम दिखाई देने वाले स्वभाव के कारण इसकी आबादी का आकलन करना चुनौतीपूर्ण माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की लाल सूची में इसे कम चिंताजनक श्रेणी में रखा गया है। भारत में इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-एक में शामिल किया गया है। इसके चलते इस छोटे वन्यजीव को विशेष कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
यह भी पढ़ें : Koriya Jeeraphool Rice : कोरिया के जीराफूल चावल को FPO मॉडल से नई पहचान
वन विभाग ने लोगों से की अपील
वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि आबादी वाले क्षेत्र में कोई वन्यजीव दिखाई देने पर उसके करीब न जाएं। उसे पकड़ने, भगाने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी न करें। ऐसे मामलों में तत्काल वन विभाग को सूचना दें, ताकि प्रशिक्षित वनकर्मी सुरक्षित तरीके से उसका रेस्क्यू कर सकें और उसे उसके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ा जा सके। दंतेवाड़ा में हुआ यह माउस डियर रेस्क्यू (Mouse Deer Rescue) वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और त्वरित रेस्क्यू कार्रवाई का उदाहरण है।
यह भी पढ़ें : Kolkata Airport Fire : ATC बिल्डिंग में लगी भीषण आग, शॉर्ट सर्किट की आशंका
माउस डियर एक नजर में
लंबाई : करीब 50 से 60 सेंटीमीटर
वजन : लगभग 3 किलोग्राम
पहचान : शरीर पर सफेद धब्बे और धारियां
सींग : नर और मादा दोनों में नहीं
आवास : घने जंगल और झाड़ियां
सक्रियता : रात और सुबह-शाम
विशेषता : हिरन जैसा दिखता है, लेकिन हिरन नहीं
यह भी पढ़ें : Raksha Bandhan 2026 : चंद्र ग्रहण के बीच होगा रक्षाबंधन, जानें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त




