सीजी भास्कर, 11 सितम्बर। गणेशोत्सव से पहले रायपुर में इस बार अलग-अलग थीम पर गणेश भगवान की खास और अनोखी प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। मूर्तिकार ग्राहकों की पसंद, उनके आइडिया और थीम के अनुसार प्रतिमाओं को नया रूप दे रहे हैं। खास बात यह है कि इन प्रतिमाओं को तैयार करने में पारंपरिक मिट्टी के साथ-साथ ऐसी चीजों का इस्तेमाल किया गया है, जिन्हें देखकर लोग भी हैरान हो रहे हैं। कहीं बांस से गणेश प्रतिमा तैयार की गई है, तो कहीं पूजा सामग्री, मोती, मसूर दाल, चना, भुट्टे और धूप-अगरबत्ती से प्रतिमाओं को आकार दिया गया है। (Raipur Unique Ganesh Idols)
- बांस से बनी गणेश प्रतिमा : Raipur Unique Ganesh Idols
- पूजा सामग्री से तैयार की गई प्रतिमा
- धूप-अगरबत्ती से बनी 12 फीट की प्रतिमा : Raipur Unique Ganesh Idols
- मसूर दाल, चना और भुट्टे से भी बनाई प्रतिमा
- ग्राहकों के आइडिया से तैयार होती हैं खास प्रतिमाएं : Raipur Unique Ganesh Idols
- 30 साल से मूर्ति बनाने का काम कर रहा परिवार
रायपुरा निवासी राहुल यादव का परिवार करीब 30 साल से गणेश प्रतिमाएं बनाने का काम कर रहा है। परिवार के दोनों बेटे भी पिछले करीब 15 साल से अपने पिता के साथ इस काम में जुटे हैं। हर साल अलग-अलग डिजाइन और थीम पर प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं, लेकिन इस बार कुछ खास प्रयोग किए गए हैं। राहुल बताते हैं कि कई ग्राहक पहले से अपनी पसंद की थीम और डिजाइन बताते हैं। इसके बाद उस आइडिया में अपनी क्रिएटिविटी जोड़कर प्रतिमा तैयार की जाती है।
बांस से बनी गणेश प्रतिमा : Raipur Unique Ganesh Idols
इस बार बांस से तैयार की गई गणेश प्रतिमा खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मूर्तिकार के मुताबिक इस प्रतिमा में मिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसे लकड़ी, पेपर और छोटे-छोटे बांस के टुकड़ों की मदद से तैयार किया गया है। बांस को पहले छोटे हिस्सों में काटा जाता है। इसके बाद उसकी ऊपर की छाल हटाकर उसे जरूरत के मुताबिक आकार दिया जाता है और एक-एक टुकड़े को जोड़कर प्रतिमा का स्ट्रक्चर तैयार किया जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय और मेहनत लगती है। बांस की कटिंग और उसे सही आकार में जोड़ने के बाद प्रतिमा को अंतिम रूप दिया जाता है। इस प्रतिमा को तैयार करने में करीब 40 से 50 हजार रुपए की लागत आई है। मूर्तिकार बताते हैं कि ऐसी प्रतिमाएं सीमित संख्या में ही बनाई जाती हैं और ज्यादातर ऑर्डर पहले ही मिल जाते हैं।
पूजा सामग्री से तैयार की गई प्रतिमा
राहुल यादव ने पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से भी गणेश प्रतिमा तैयार की है। इसमें नारियल की जूट से प्रतिमा का बेसिक आकार बनाया गया है। इसके अलावा धोती में जनेऊ, कमल गट्टे से माला और रुद्राक्ष व मौली धागे जैसी पूजा सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। प्रतिमा की सजावट में मोतियों का भी इस्तेमाल किया गया है।
मूर्तिकार के मुताबिक मोतियों से तैयार की गई छोटी प्रतिमाओं को लोग घर में रखने या गृह प्रवेश जैसे मौकों पर उपहार के तौर पर भी पसंद करते हैं। इन प्रतिमाओं में पारंपरिक सजावट के बजाय पूजा सामग्री को ही डिजाइन का हिस्सा बनाया गया है।

धूप-अगरबत्ती से बनी 12 फीट की प्रतिमा : Raipur Unique Ganesh Idols
इस बार सबसे अलग प्रयोगों में से एक धूप-अगरबत्ती से तैयार की गई 12 फीट की गणेश प्रतिमा है। इस प्रतिमा को तैयार करने में करीब तीन महीने का समय लगा है। इसमें अलग-अलग रंग की धूप की स्टिक का इस्तेमाल किया गया है। गीली धूप की मदद से माला, पुष्प और कड़े जैसी सजावट तैयार की गई है।
राहुल के मुताबिक इस प्रतिमा का स्ट्रक्चर एक समिति की पसंद के अनुसार तैयार किया जा रहा है। समिति ने अपनी पसंद का डिजाइन और स्ट्रक्चर बताया था, जिसके आधार पर प्रतिमा को आकार दिया गया। मिट्टी की प्रतिमा की तुलना में इस तरह की प्रतिमा हल्की होती है, इसलिए इसे जरूरत के अनुसार एक जगह से दूसरी जगह ले जाकर अलग-अलग हिस्सों पर काम करना आसान रहता है।
मसूर दाल, चना और भुट्टे से भी बनाई प्रतिमा
राहुल यादव ने खाने में इस्तेमाल होने वाली चीजों से भी गणेश की एक अलग प्रतिमा तैयार की है। इसमें मसूर दाल, चना और भुट्टे जैसी खाद्य सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। अलग-अलग सामग्री को व्यवस्थित तरीके से सजाकर गणेश प्रतिमा का आकार दिया गया है।
पारंपरिक मिट्टी की प्रतिमाओं से अलग यह प्रयोग लोगों के लिए नया आकर्षण है। खाद्य सामग्री से बनी यह प्रतिमा अलग-अलग रंग और बनावट के कारण देखने में भी खास नजर आती है।
ग्राहकों के आइडिया से तैयार होती हैं खास प्रतिमाएं : Raipur Unique Ganesh Idols
मूर्तिकार बताते हैं कि इन खास प्रतिमाओं के पीछे सिर्फ उनकी क्रिएटिविटी ही नहीं, बल्कि ग्राहकों के आइडिया भी शामिल होते हैं। ग्राहक अपनी पसंद की थीम, डिजाइन और स्ट्रक्चर बताते हैं। इसके बाद मूर्तिकार उस आइडिया को अपनी कला और अनुभव के साथ मिलाकर प्रतिमा का रूप देते हैं।
ऐसी प्रतिमाओं के लिए ग्राहकों को पहले से ऑर्डर देना पड़ता है, क्योंकि इन्हें तैयार करने में सामान्य प्रतिमाओं की तुलना में ज्यादा समय लगता है। सीमित संख्या में बनने वाली इन प्रतिमाओं पर कई बार तीन महीने तक लगातार काम चलता है।
30 साल से मूर्ति बनाने का काम कर रहा परिवार
रायपुर के रायपुरा इलाके में रहने वाला शिवचरण यादव का परिवार करीब 30 साल से गणेश प्रतिमाएं बनाने का काम कर रहा है। परिवार की अगली पीढ़ी भी इस पारंपरिक काम से जुड़ी हुई है। राहुल यादव और उनके भाई करीब 15 साल से अपने पिता के साथ मिलकर प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं।
रामसागर पारा की एक समिति पिछले करीब 17 साल से उनके परिवार से गणेश प्रतिमा बनवा रही है। राहुल बताते हैं कि उनके पास सीमित संख्या में ही ऑर्डर लिए जाते हैं और कई समितियां करीब तीन महीने पहले ही अपनी पसंद की प्रतिमा का ऑर्डर दे देती हैं। इस बार भी अलग-अलग थीम पर तैयार की जा रही इन अनोखी प्रतिमाओं को देखने के लिए लोगों में उत्सुकता बनी हुई है।


