सीजी भास्कर, 22 सितंबर : पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र में खेती की चुनौती झेल रहे आदिवासी किसानों को अब सिंचाई की बड़ी राहत मिली है। नकटी नाले पर बने स्टॉपडेम (Stop Dam Irrigation) से करीब 30 एकड़ खेतों तक पानी पहुंच रहा है और धान की फसल लहलहा रही है। कोरिया जिले की कदमनारा ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम जोबापारा में करीब दो दर्जन आदिवासी परिवार रहते हैं। पहाड़ी के नीचे बहने वाले नकटी नाले पर स्टॉपडेम बनने के बाद यहां के किसानों को सिंचाई के लिए पानी की स्थायी सुविधा मिली है।

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कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से संघर्ष
जोबापारा पहाड़ी क्षेत्र में बसा हुआ है। गांव के नीचे नकटी नाला बहता है, लेकिन खेतों की ऊंच-नीच और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण किसानों के लिए खेती करना आसान नहीं था। नाले में पानी होने के बावजूद खेतों तक पानी पहुंचाना बड़ी चुनौती बनी हुई थी। अब स्टॉपडेम (Stop Dam Irrigation) बनने से किसानों की यह समस्या काफी हद तक दूर हो गई है। पानी को रोककर उसका उपयोग खेतों की सिंचाई के लिए किया जा रहा है।
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मनरेगा से बना स्टॉपडेम
जोबापारा के किसानों ने ग्राम पंचायत में नकटी नाले पर स्टॉपडेम निर्माण की मांग रखी थी। ग्राम सभा के निर्णय के बाद मनरेगा के तहत इसके निर्माण के लिए 19 लाख रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई। ग्राम पंचायत की देखरेख में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद करीब एक दर्जन किसान सीधे तौर पर इससे लाभान्वित हो रहे हैं। स्टॉपडेम (Stop Dam Irrigation) ने खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था को आसान कर दिया है।
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सोलर पंप से खेतों तक पहुंच रहा पानी
किसानों ने बताया कि स्टॉपडेम का निर्माण पूरा होने के बाद उन्होंने सौर सुजला योजना के माध्यम से सोलर पंप लगवाए। अब सौर ऊर्जा की मदद से स्टॉपडेम में जमा पानी को ऊपर स्थित खेतों तक आसानी से पहुंचाया जा रहा है। जरूरत के अनुसार स्टॉपडेम में बिजली से चलने वाले पंप का उपयोग भी किया जा सकता है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त सुविधा मिल रही है।
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धान के बाद गेहूं और सब्जी की तैयारी
ग्राम पंचायत के सरपंच दयाल साय ने बताया कि पहले नाले में तेज बहाव के कारण पानी रोकना मुश्किल था। स्टॉपडेम बनने के बाद पानी को रोककर उसका उपयोग खेती में किया जा रहा है। अब गांव के करीब 30 एकड़ खेतों में सिंचाई हो रही है। किसान धान की फसल के बाद गेहूं और सब्जियों की खेती करने की भी तैयारी कर रहे हैं। इस तरह स्टॉपडेम (Stop Dam Irrigation) से खेती का दायरा बढ़ने के साथ किसानों की आय के नए अवसर भी बन रहे हैं।
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इन किसानों को मिला सीधा लाभ
स्टॉपडेम से जोबापारा के कई आदिवासी किसानों के खेतों में सिंचाई की सुविधा पहुंची है। इनमें धर्मपाल की 2 एकड़, राम सिंह की 2 एकड़, प्रभुदयाल की 1 एकड़, जोखन राम की 1 एकड़, गणेश की 1.5 एकड़, उमेश कुमार की 3 एकड़ और दयाल साय की 5 एकड़ कृषि भूमि शामिल है। इसके अलावा करण साय की 3 एकड़, वंश गोपाल की 3 एकड़, लोधे राम की 3 एकड़, शेषमन की 2 एकड़ और दखल साय की 3 एकड़ भूमि में भी सिंचाई सुविधा उपलब्ध हुई है।
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फसल उत्पादन बढ़ने की उम्मीद
स्टॉपडेम के जरिए खेतों तक पानी पहुंचने से किसान अब केवल बारिश पर निर्भर नहीं हैं। धान की फसल के बाद गेहूं और सब्जियों की खेती की योजना से साल में एक से अधिक फसल लेने की संभावना बढ़ी है। जोबापारा के आदिवासी किसान अब बेहतर खेती की उम्मीद के साथ आगामी फसलों की तैयारी में जुटे हैं। स्थानीय स्तर पर बना यह स्टॉपडेम (Stop Dam Irrigation) ग्रामीण परिवारों के लिए सिंचाई सुविधा के साथ खुशहाली का आधार बन रहा है।



