सीजी भास्कर, 30 अक्टूबर । सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए बैंकों और वित्तीय संस्थानों की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अगर बैंक की लापरवाही के कारण साइबर ठगी होती है, तो पीड़ित को मुआवजा देने और जिम्मेदारी तय करने पर विचार होना चाहिए। हालांकि, यह फिलहाल एक प्रस्ताव है, अंतिम आदेश नहीं। (Supreme Court On Digital Arrest)
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ठगी रोकने के लिए पहले से इंतजाम करने पर दिया जोर: Supreme Court On Digital Arrest
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल किया कि लगातार जागरूकता अभियान और मीडिया में खबरें आने के बावजूद शिक्षित लोग भी ऐसी ठगी का शिकार क्यों हो रहे हैं। अदालत ने कहा कि केवल घटना के बाद रिपोर्ट तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ठगी रोकने के लिए पहले से इंतजाम जरूरी हैं।
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असामान्य बैंक लेन-देन की जानकारी स्थानीय पुलिस को देने पर जोर
कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि खातों में असामान्य लेन-देन होने पर बैंक संदिग्ध ट्रांजैक्शन को अस्थायी रूप से रोककर उसकी जांच क्यों नहीं कर सकते। साथ ही, ऐसे मामलों की जानकारी स्थानीय पुलिस को देने की व्यवस्था पर भी जोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने RBI से प्रस्तावित KYC संशोधन निर्देश, 2026 की समीक्षा करने और सभी अधिकृत वित्तीय संस्थानों की सूची पेश करने को कहा।
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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2026 में अब तक 22 हजार से ज्यादा मामले : Supreme Court On Digital Arrest
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में अब तक डिजिटल अरेस्ट के 22 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हुए और 800 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी हुई। वहीं, 2025 में 58,239 मामले सामने आए थे, जिनमें करीब 1,211 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई।
सुनवाई में एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता एनएस नप्पिनई ने बताया कि हाल ही में एक महिला से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.5 करोड़ रुपये की ठगी हुई। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के डर से पीड़ित मानसिक दबाव में आकर ठगों के निर्देश मान लेते हैं और अपनी जमा-पूंजी गंवा बैठते हैं।
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बैंक की जवाबदेही और मुआवजे पर अभी अंतिम फैसला नहीं
इससे पहले 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए होने वाली ठगी को गंभीर अपराध बताते हुए सख्त कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया था। जुलाई में भी कोर्ट ने केंद्र सरकार से डिजिटल अरेस्ट को अलग अपराध बनाने और इसके लिए कड़ी सजा के प्रावधान (Supreme Court On Digital Arrest) पर विचार करने को कहा था।
फिलहाल, बैंक की जवाबदेही और पीड़ितों को मुआवजा देने का प्रस्ताव चर्चा में है। अंतिम फैसला आने तक इस पर आगे की कार्रवाई और RBI की समीक्षा अहम रहेगी।
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