सीजी भास्कर, 02 नवम्बर । महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के मुख्य आरोपी और प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ओमान से गिरफ्तार कर भारत वापस ला लिया है। उसे 1 नवंबर को मस्कट से भारत लाया गया। अब सबसे पहले उसे दिल्ली की अदालत में पेश किया जाएगा। यहां से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उसे रायपुर लाया जा सकता है, जहां विशेष CBI अदालत में पेश किया जाएगा। ( Mahadev Betting App Case)
महादेव सट्टा ऐप से जुड़े मामलों की जांच CBI कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले से संबंधित 13 FIR की जांच एजेंसी को सौंपी थीं। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी सौरभ के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कार्रवाई कर रहा है। ED उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत और चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
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116 दिन बाद ओमान से भारत लाया गया : Mahadev Betting App Case
CBI के मुताबिक, महादेव सट्टा नेटवर्क की जांच शुरू होने के बाद से ही सौरभ चंद्राकर फरार था। वह 2023 से दुबई में रह रहा था और उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने कथित तौर पर फर्जी पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और UAE से ओमान पहुंच गया।
जांच के दौरान उसके कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट की जानकारी सामने आई थी। पासपोर्ट पर उसकी तस्वीर थी, लेकिन नाम ‘अजंता मेंडिस’ दर्ज था। जन्मतिथि भी उसके दूसरे दस्तावेजों से अलग बताई गई थी।
खुफिया जानकारी और रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर 8 जुलाई 2026 को ओमान की रॉयल पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद CBI और ED ने भारत सरकार के माध्यम से ओमान को प्रत्यर्पण का औपचारिक प्रस्ताव भेजा और जरूरी सबूत सौंपे। इंटरपोल, भारतीय एजेंसियों और ओमान के अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद प्रत्यर्पण को मंजूरी मिली। इसके बाद CBI की टीम मस्कट पहुंची और 1 नवंबर को सौरभ को भारत लेकर आई।

CBI और ED कर सकती हैं पूछताछ
भारत आने के बाद सौरभ का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद CBI उसे ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर ला सकती है। CBI उसके खिलाफ दो मामलों में पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। वहीं, ED ने भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उसके खिलाफ चार्जशीट दायर की है।
अब दोनों एजेंसियां पहले से जुटाए गए सबूतों के आधार पर उससे पूछताछ कर सकती हैं। पहले CBI उससे सवाल-जवाब करेगी। इसके बाद ED भी रिमांड लेकर पूछताछ कर सकती है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी पर CBI को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रोटेक्शन मनी किन-किन लोगों तक पहुंचती थी, इसका बड़ा खुलासा हो सकता है।
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ओमान में जान का खतरा होने का जताया था डर : Mahadev Betting App Case
ओमान में हिरासत के दौरान सौरभ चंद्राकर ने भारत की जेल में अपनी जान को खतरा होने की आशंका जताई थी। उसने अपने परिवार की सुरक्षा की मांग भी की थी। सौरभ का दावा था कि महादेव सट्टा नेटवर्क से जुड़े प्रभावशाली लोग उसे और उसके परिवार को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
उसने जांच के दौरान सुरक्षा देने और बिना किसी दबाव के अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग की थी। साथ ही उसने महादेव सट्टा नेटवर्क के राजनीतिक संपर्कों, पैसों के लेन-देन और विदेशों में मौजूद संपत्तियों से जुड़ी जानकारी जांच एजेंसियों को देने की बात कही थी। उसने भारत आकर जांच एजेंसियों और अदालत में बयान देने की तैयारी भी जताई थी।
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देशभर में फैला था ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क
CBI की जांच में सामने आया कि महादेव ऑनलाइन बुक देश के बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में शामिल था। इसका संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था। इस प्लेटफॉर्म के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और अन्य खेलों पर ऑनलाइन सट्टा लगाया जाता था।
नेटवर्क को फ्रेंचाइजी की तरह पैनल और शाखाओं के माध्यम से चलाया जाता था। इनके जरिए लोगों को सट्टेबाजी से जोड़ा जाता था और उनसे रकम जमा कराई जाती थी। सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए इस नेटवर्क को लाखों यूजर्स तक पहुंचाया था।
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हवाला के जरिए विदेश भेजी जाती थी सट्टे की रकम : Mahadev Betting App Case
जांच एजेंसी के मुताबिक, सट्टेबाजी से हासिल रकम कई बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इसके बाद अलग-अलग लेनदेन के जरिए पैसे को छिपाकर हवाला के माध्यम से विदेश भेजा जाता था। CBI की जांच में यह भी सामने आया कि नेटवर्क को बिना रुकावट चलाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत दी जाती थी।
इस मामले में CBI ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, IPC की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं के साथ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की है। वहीं, ED भारत और विदेश में नेटवर्क से जुड़ी कई संपत्तियां अटैच कर चुकी है।
अब सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद जांच एजेंसियों की पूछताछ में महादेव सट्टा नेटवर्क के संचालन, वित्तीय लेन-देन और कथित संरक्षण से जुड़े मामलों में नए खुलासे होने की उम्मीद है।


