सीजी भास्कर, 07 अगस्त। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भिलाई के चर्चित ट्रिपल मर्डर केस में अहम फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी रवि शर्मा की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर‘ की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड उचित नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि दोषी को बिना किसी समयपूर्व रिहाई या कानूनी छूट के जीवनभर जेल में रहना होगा। (Bhilai Triple Murder Case)

फिल्मी अंदाज में रची थी हत्या की साजिश : Bhilai Triple Murder Case
यह मामला 21 जनवरी 2020 का है, जब भिलाई के तालपुरी स्थित एक किराए के मकान से आरोपी की पत्नी मंजू शर्मा, उनकी डेढ़ माह की बेटी और एन. राजू के शव बरामद हुए थे। जांच में सामने आया कि आरोपी ने पहले तीनों को नींद की दवा दी, फिर टेप से हाथ-पैर और मुंह बांधकर उनकी हत्या कर दी। इसके बाद उसने सबूत मिटाने के लिए शवों को जलाने की कोशिश की और खुद को मृत साबित करने के लिए पूरी घटना को आत्महत्या जैसा दिखाने की योजना बनाई।
पुलिस जांच में आरोपी के पास मिला चिपकने वाला टेप घटनास्थल पर इस्तेमाल किए गए टेप से मेल खा गया। इसके अलावा नींद की दवा का खाली रैपर और दीवार पर लिखे नोट की लिखावट भी आरोपी से जुड़ी पाई गई। इन्हीं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी।
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हाईकोर्ट ने बताया क्यों बदली सजा
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी का अपराध अत्यंत गंभीर, सुनियोजित और विश्वासघात से जुड़ा है। उसने अपनी पत्नी और मासूम बच्ची की हत्या करने के साथ एक निर्दोष व्यक्ति की जान लेकर खुद को मृत साबित करने की साजिश रची। इसके बावजूद अदालत ने माना कि यह ऐसा मामला (Bhilai Triple Murder Case) नहीं है, जिसमें फांसी ही एकमात्र उपयुक्त सजा हो।
अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 201 के तहत दोषी मानते हुए उसकी सजा को बिना किसी समयपूर्व रिहाई के आजीवन कारावास में परिवर्तित कर दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 72 और 161 के तहत राष्ट्रपति या राज्यपाल के समक्ष दया याचिका का अधिकार आरोपी के पास बना रहेगा।
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