सीजी भास्कर, 23 अगस्त। रायपुर, छत्तीसगढ़ में सरकारी विभागों के करीब 400 करोड़ रुपए के मुद्रण कार्य को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शासकीय मुद्रणालय की नई निविदा में रखी गई शर्तों पर स्थानीय मुद्रकों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। (₹400 Crore Printing Tender)
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टेंडर की शर्तों पर स्थानीय मुद्रकों ने उठाए सवाल : ₹400 Crore Printing Tender
मुद्रकों का आरोप है कि न्यूनतम 5 करोड़ रुपए का वार्षिक टर्नओवर, वेब ऑफसेट मशीन और करीब 20 हजार वर्गफुट अधोसंरचना जैसी शर्तों के कारण स्थानीय प्रिंटिंग इकाइयों के लिए टेंडर में शामिल होना मुश्किल हो गया है।
स्थानीय मुद्रकों का कहना है कि छत्तीसगढ़ संवाद, पाठ्य पुस्तक निगम और शासकीय मुद्रणालय सभी सरकारी मुद्रण कार्य से जुड़े हैं, लेकिन निविदा की शर्तों में इतना बड़ा अंतर क्यों है?
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पिछले पांच साल के प्रिंटिंग कार्यों की जांच की मांग
मुद्रण उद्योग से जुड़े लोगों ने पिछले पांच वर्षों में हुए करीब 400 करोड़ रुपए के प्रिंटिंग कार्यों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनकी मांग है कि एल-1 दर, कार्यादेश, वास्तविक कार्य आवंटन और भुगतान का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
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चुनिंदा फर्मों को काम देने के आरोप : ₹400 Crore Printing Tender
मुद्रकों ने आरोप लगाया है कि बड़ा हिस्सा कथित तौर पर कुछ चुनिंदा फर्मों को ही मिला। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।स्थानीय मुद्रकों की मांग है कि निविदा की शर्तों को युक्तिसंगत बनाया जाए, ताकि तकनीकी गुणवत्ता बनाए रखते हुए स्थानीय उद्योगों को भी समान अवसर मिल सके।
अब यह मामला सरकारी मुद्रण कार्यों में पारदर्शिता, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और स्थानीय उद्योगों के अवसरों को लेकर बड़ा सवाल बन गया है।
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