सीजी भास्कर, 03 सितम्बर। छत्तीसगढ़ के प्रमुख गंगरेल बांध में जलभराव 96.17 प्रतिशत तक पहुंचने के बाद दो गेट खोल दिए गए हैं। बांध से करीब 4 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। यह पानी रुद्री बैराज पहुंचने के बाद महानदी और मुख्य नहर में छोड़ा जा रहा है। जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने नदी और नालों के किनारे बसे गांवों के लोगों को सतर्क रहने की अपील की है। (Gangrel Dam Gate Opening)
यह भी पढ़ें : CG Tourism : गंगरेल बांध द्वीपों का समूह… 7 आईलैंड में झील, जंगल और शांति का अनोखा संगम, होगा स्वर्ग जैसा अनुभव
जलाशय में 4,342 क्यूसेक पानी की आवक : Gangrel Dam Gate Opening
लगातार बारिश के कारण गंगरेल जलाशय में पानी की आवक बनी हुई है। 1 सितंबर की सुबह तक जलाशय 96.17 प्रतिशत भर चुका था और इसमें 4,342 क्यूसेक पानी पहुंच रहा था। इसके अलावा मुरुमसिल्ली जलाशय में 745 क्यूसेक, दुधावा में 1,178 क्यूसेक और सोढ़ुर जलाशय में 167 क्यूसेक पानी की आवक दर्ज की गई।
आगे भी बारिश की संभावना को देखते हुए गंगरेल के दो गेटों से करीब 4 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। रुद्री बैराज पहुंचने के बाद करीब 2 हजार क्यूसेक पानी महानदी मुख्य नहर और 2 हजार क्यूसेक पानी महानदी में छोड़ा जा रहा है।
यह भी पढ़ें : Dhamtari Tourism : गंगरेल का ‘मिनी गोवा’ बना छत्तीसगढ़ का टूरिज्म हब, लबालब जलाशय और वाटर स्पोर्ट्स खींच रहे सैलानी

नदी किनारे रहने वालों को सुरक्षित जगह जाने की अपील
महानदी में पानी छोड़े जाने से नदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए प्रशासन ने नदी-नालों और तेज बहाव वाले इलाकों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने कहा है। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में लोगों से तुरंत ऊंची और सुरक्षित जगह पर जाने की अपील की गई है। साथ ही नदी, नाला या तेज बहाव वाले पानी को पार नहीं करने की सलाह दी गई है।
यह भी पढ़ें : Dhamtari Flood Alert : भारी बारिश से उफान पर नदियां, गंगरेल के 3 गेट खुले, तटीय गांवों में हाई अलर्ट
मॉडमसिल्ली बांध 100% भरा, साइफन सिस्टम हुआ सक्रिय : Gangrel Dam Gate Opening
लगातार बारिश के बीच मॉडमसिल्ली बांध भी पूरी तरह भर गया है। जलस्तर तय सीमा तक पहुंचने के बाद बांध का ऑटोमेटिक साइफन सिस्टम सक्रिय हो गया है और स्पिलवे से पानी बाहर निकल रहा है।
इस बांध की सबसे खास विशेषता इसका साइफन सिस्टम है। वर्ष 1914 से 1923 के बीच
बनाए गए इस ऐतिहासिक बांध में 34 साइफन स्पिलवे हैं। पानी एक निर्धारित स्तर तक पहुंचते ही साइफन अपने आप सक्रिय होकर अतिरिक्त पानी बाहर निकालने लगते हैं। इसके लिए अलग से गेट खोलने की जरूरत नहीं पड़ती।
यह भी पढ़ें : Surajpur Boat Accident Three Missing : बांध में पलटी नौ लोगों से भरी नाव
बारिश के बीच आकर्षण का केंद्र बना बांध
सौ साल से ज्यादा पुराना मॉडमसिल्ली बांध अपनी अनोखी इंजीनियरिंग के लिए जाना जाता है। लगातार बारिश के बाद बांध के पूरी क्षमता तक भरने और साइफन सिस्टम के सक्रिय होने से यहां पानी तेजी से बाहर निकल रहा है। ऑटोमेटिक तरीके से काम करने वाली यह व्यवस्था बारिश के मौसम में लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
यह भी पढ़ें : Prakriti Rakhi Festival : किसान स्कूल में मनेगा प्रकृति राखी त्योहार, पेड़-पौधों को राखी बांधेंगी महिलाएं



