सीजी भास्कर, 19 अगस्त : सरकारी कार्रवाई का इंतजार करने के बजाय ग्रामीणों ने खुद नशा, जुआ और सट्टे के खिलाफ मोर्चा संभाल लिया है। गांवों में कड़े नियम बनाए गए हैं और नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है। इस नशा मुक्ति अभियान (Nasha Mukti Anti-Gambling Campaign) का असर अब जमीन पर दिखाई दे रहा है। पुलिस के अनुसार इन गांवों में अपराध के मामलों में करीब 90 फीसदी तक कमी आई है।
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बालोद के 6 गांवों ने बनाया अपना नियम
बालोद जिले के घुमका, पोंडी, कुरदी, जगन्नाथपुर, बघमरा और सुरडोंगर-मरकाटोला गांवों ने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ सामूहिक फैसला लिया है। ग्रामीणों ने अवैध शराब बिक्री, शराब पीकर हुल्लड़बाजी और जुआ-सट्टे पर रोक लगाने के लिए अलग-अलग नियम बनाए हैं।
इन नियमों की निगरानी के लिए ग्रामीण समितियां सक्रिय हैं। कई गांवों में महिलाओं को भी निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गई है। इसके चलते सामाजिक माहौल में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
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पुलिस का दावा, 90 फीसदी तक घटे अपराध
बालोद थाना प्रभारी शिशुपाल सिन्हा के मुताबिक ग्रामीणों की सजगता से संबंधित इलाकों में अपराध करीब 90 प्रतिशत तक कम हुए हैं। घुमका गांव में पिछले दो-तीन साल से अवैध शराब बिक्री का एक भी मामला सामने नहीं आया है। जुआ और सट्टे पर लगाम लगने से भी गांवों का माहौल बेहतर हुआ है। पुलिस अब जिले के दूसरे गांवों को भी इस सामुदायिक मॉडल को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।
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घुमका में शराब बेचने पर 51 हजार का जुर्माना
घुमका गांव में वर्ष 2022 से शराब बेचने और खरीदने वालों के खिलाफ कड़ा नियम लागू है। शराब बेचने पर 51 हजार रुपए का जुर्माना (Nasha Mukti Anti-Gambling Campaign) तय किया गया है।
नियम तोड़ने पर पहले पुरुष समिति समझाइश देती है। इसके बाद भी सुधार नहीं होने पर महिला समिति मोर्चा संभालती है। ग्रामीणों की इस व्यवस्था से महिलाओं में सुरक्षा की भावना भी बढ़ी है। आसपास के करीब 10 गांव भी इस मॉडल को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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सुरडोंगर-मरकाटोला में नशे पर भारी जुर्माना
वनांचल क्षेत्र के सुरडोंगर-मरकाटोला में ग्रामसभा ने पूर्ण नशाबंदी का प्रस्ताव पारित किया है। घर में नशा करते पकड़े जाने पर 3,500 रुपए और अवैध शराब बनाने पर 35 हजार रुपए का जुर्माना तय किया गया है।
इतना ही नहीं, अवैध शराब की जानकारी देने वाले व्यक्ति को 5 हजार रुपए का इनाम देने का भी नियम बनाया गया है। इससे ग्रामीणों को अवैध गतिविधियों की सूचना देने के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है।
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जगन्नाथपुर में महिलाओं के हाथ में निगरानी
जगन्नाथपुर सांकरा में ग्राम समिति की पूरी कमान महिलाओं के हाथ में है। अध्यक्ष से लेकर सदस्यों तक सभी महिलाएं हैं। ग्राम अध्यक्ष कोमिन साहू के नेतृत्व में शराबखोरी और हुल्लड़बाजी रोकने के लिए 25 हजार रुपए का जुर्माना निर्धारित किया गया है।
महिला समिति की सक्रियता से गांव में सामाजिक अनुशासन मजबूत हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि सामूहिक निगरानी से शराब और नशे से जुड़ी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगी है।
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पोंडी में जुआ-सट्टे पर भी सख्ती
पोंडी में करीब तीन साल पहले अवैध शराब और जुआ-सट्टे के खिलाफ 25 हजार रुपए का जुर्माना तय किया गया था। नियम तोड़ने वालों से जुर्माना वसूला गया। इसके बाद गांव में ऐसी गतिविधियों पर काफी हद तक रोक लगी है।
वहीं कुरदी में शराब बेचने पर 10 हजार और शराब खरीदने पर 15 हजार रुपए का जुर्माना निर्धारित है। सरपंच संजय कुमार की पहल पर गांव में सीसीटीवी कैमरे लगाकर निगरानी भी की जा रही है।
बघमरा में भी ग्रामीणों की सख्त निगरानी
बघमरा गांव में भी नशा और अवैध शराब के खिलाफ इसी तरह की सामुदायिक व्यवस्था लागू की गई है। ग्रामीणों की निगरानी और सामूहिक फैसलों से गांव में सामाजिक बुराइयों पर नियंत्रण की कोशिश की जा रही है।
बालोद के इन छह गांवों की पहल यह दिखाती है कि Nasha Mukti Anti-Gambling Campaign सिर्फ सरकारी कार्रवाई तक सीमित नहीं है। जब ग्रामीण खुद नियम बनाकर उनकी निगरानी करते हैं, तो नशा, जुआ और सट्टे जैसी सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
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